डेस्क: भारतीय महिला क्रिकेट टीम का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. 40 साल पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तत्कालीन कप्तान डायना एडुल्जी को ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान के पवेलियन में प्रवेश करने से रोक दिया गया था, उसी मैदान पर हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने इंग्लैंड को धूल चटा दी और क्रिकेट के मक्का के 142 सालों के इतिहास में हुए पहले महिला टेस्ट में 270 रनों से जीत दर्ज की है.
1986 में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने लिंग आधारित नियमों का हवाला देते हुए डायना एडुल्जी को और भारतीय टीम को पवेलियन में जाने की अनुमति नहीं दी थी. इसका एडुल्जी ने कड़ा विरोध किया था. लेकिन अब उसी मैदान पर मेजबान टीम का किसी भी एरिया में टीम इंडिया को रोक नहीं पाई.
142 सालों में पहला महिला टेस्ट
लॉर्ड्स में पहला पुरुष टेस्ट मैच 21 से 23 जुलाई 1884 के बीच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था. लेकिन इस मैदान पर महिलाओं के टेस्ट के लिए 142 साल और 150 टेस्ट मैचों का इंतजार करना पड़ा. हालांकि, भारतीय महिला टीम ने इस ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड की को 270 रनों से हराकर इस मौके को यादगार बना दिया है.
हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम हर मामले में इंग्लैंड से बेहतर साबित हुई – चाहे वो बैटिंग हो, बॉलिंग हो या फील्डिंग. रेड-बॉल क्रिकेट में भारत का दबदबा कायम है. पिछले 11 टेस्ट मैचों में टीम ने सात जीत हासिल की हैं, तीन मैच ड्रॉ रहे हैं और सिर्फ़ एक में हार मिली है. यह इंग्लैंड में भारतीय महिला टीम का 11वां टेस्ट मैच था और वे वहां इस फ़ॉर्मेट में अब भी अजेय हैं.
स्पिनर स्नेह राणा के सामने इंग्लैंड का सरेंडर
बात अगर मैच की करें तो सोमवार को ऑफ स्पिनर स्नेह राणा की अगुवाई में गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड को 270 रन के बड़े अंतर से हरा दिया. जीत के लिए 457 रन के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम 186 रन पर सिमट गई. इंग्लैंड ने दिन की शुरुआत छह विकेट पर 130 रन से की थी.
भारत की ओर से स्पिनर स्नेह ने 42 रन देकर चार विकेट चटकाए जबकि दीप्ति शर्मा, सयाली सतघरे और क्रांति गौड़ ने दो-दो विकेट हासिल किए. विकेटकीपर बल्लेबाज एमी जोन्स ने इंग्लैंड के लिए सर्वाधिक 52 रन बनाए जबकि सोफी एकलेस्टोन ने 50 रन की पारी खेली.
पहले ही दिन से भारत की पकड़ रही मजबूत
भारत ने मैच के पहले ही दिन से अपनी पकड़ बना रखी थी. पहले दिन इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों को नई गेंद से कंट्रोल बनाने में मुश्किल हुई और स्मृति मंधाना ने इसका फ़ायदा उठाया और अर्धशतक लगाया. जबकि हरमनप्रीत कौर (58) और दीप्ति शर्मा (57) ने भी अर्धशतक लगाए, जिससे भारत ने अपनी पहली पारी में 285 रन बनाए.
इसके बाद क्रांति गौड़ ने पांच विकेट लेकर लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया और इंग्लैंड को 170 रन पर ऑल आउट कर दिया. पहली पारी में 115 रनों की बढ़त के साथ, भारत ने दूसरी पारी में अपनी पकड़ और मज़बूत की. जहां पहली पारी में मंधाना ने 83 रन बनाए तो दूसरी पारी में उन्होंने 70 रन ठोके. इसके बाद यस्तिका भाटिया ने बेहतरीन 113 रन बनाकर इंग्लैंड को मुकाबले से बाहर कर दिया.
इस शतक के साथ ही यस्तिका भाटिया का नाम लॉर्ड्स के लीडर बोर्ड पर आया. अंत में ऋचा घोष ने नाबाद 50 रन (52 गेंदों पर) बनाकर रही-सही कसर पूरी कर दी, जो इंग्लैंड की हार पर आखिरी कील साबित हुई.
457 रनों के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए, इंग्लैंड की बल्लेबाजी एक बार फिर लड़खड़ा गई और टीम दूसरी पारी में 186 रन पर ऑल आउट हो गया. एमी जोन्स ही एकमात्र ऐसी बल्लेबाज़ थीं जिन्होंने दोनों पारियों में संघर्ष किया. हीदर नाइट और टैमी ब्यूमोंट का यह आखिरी मैच रहा और उन्होंने ऐसी विदाई की उम्मीद तो नहीं की होगी. क्रांति गोड़ को उनकी गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.

