डेस्क: जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने शनिवार को अपने प्रयोगात्मक पुन: प्रयोज्य रॉकेट का पहला सफल परीक्षण उड़ान अभियान पूरा किया। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब जापान अंतरिक्ष प्रक्षेपण की लागत कम करने और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में स्पेसएक्स जैसी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नई तकनीक विकसित करने में जुटा है। रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी, हवा में नियंत्रित तरीके से मंडराया, क्षैतिज दिशा में आगे बढ़ा और फिर सुरक्षित तरीके से वापस जमीन पर उतर गया।
आरवी-एक्स (RV-X) रॉकेट ने पूर्वोत्तर जापान स्थित जाक्सा के नोशिरो परीक्षण केंद्र से उड़ान भरी। करीब एक मिनट से भी कम समय तक चली इस परीक्षण उड़ान के दौरान रॉकेट ने पहले ऊंचाई हासिल की, फिर कुछ समय तक हवा में स्थिर रहा, उसके बाद क्षैतिज दिशा में आगे बढ़ा और अंत में सुरक्षित लैंडिंग की। इस पूरे परीक्षण का सीधा प्रसारण अंतरिक्ष प्रेमियों के समूह एनवीएस (NVS) ने किया।
जाक्सा ने बताया कि वह शनिवार को ही ऑनलाइन ब्रीफिंग के दौरान इस परीक्षण के विस्तृत परिणाम साझा करेगा। इस परीक्षण को जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
जापान लंबे समय से ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे रॉकेट को कई बार इस्तेमाल किया जा सके। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पिछले कई वर्षों से इसी तकनीक का इस्तेमाल कर अंतरिक्ष मिशनों की लागत में भारी कमी ला चुकी है। अब जापान भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि वह वैश्विक लॉन्च बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सके।
शनिवार का यह परीक्षण जापान के लिए कम लागत वाले नए रॉकेट विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। भविष्य में यही तकनीक देश के मौजूदा एकबार इस्तेमाल होने वाले एच-3 (H3) रॉकेट का अधिक किफायती और आधुनिक विकल्प तैयार करने में मदद करेगी।
इस परीक्षण से ठीक एक दिन पहले चीन के सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि देश ने भी प्रक्षेपण के बाद पहली बार किसी रॉकेट के पहले चरण को सफलतापूर्वक वापस हासिल करने में सफलता पाई है। ऐसे में एशिया की दो बड़ी अंतरिक्ष शक्तियां अब पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
जापान का एच-3 रॉकेट अपने पुराने एच-2ए (H-2A) रॉकेट की तुलना में अधिक किफायती बनाया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाजार में प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने के लिए इसकी लॉन्च लागत को और कम करना अभी भी जरूरी माना जा रहा है।
जापानी सरकार का मानना है कि अंतरिक्ष तक पहुंच की विश्वसनीय और व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी क्षमता देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक को भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
जाक्सा और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज मिलकर आरवी-एक्स रॉकेट विकसित कर रहे हैं। इस रॉकेट का व्यास 1.8 मीटर और लंबाई 7.3 मीटर है। इसमें अधिक टिकाऊ इंजन लगाए गए हैं और सुरक्षित लैंडिंग के लिए चार झटके सोखने वाले लैंडिंग गियर भी लगाए गए हैं।
जाक्सा फ्रांस और जर्मनी के साथ मिलकर भी पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक पर काम कर रहा है। आने वाले परीक्षणों में आरवी-एक्स रॉकेट को लगभग 100 मीटर की ऊंचाई तक भेजने की योजना है, ताकि इसकी क्षमताओं का और बेहतर परीक्षण किया जा सके।

