अन्य

राम नाम के बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

डेस्क:उज्जैन । श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी (दोपहर 12:22 बजे तक) के अवसर पर बुधवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने देर रात से ही कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल को राम नाम के बेलपत्र से सजाया गया।
महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही बाबा के दर्शन करने के लिए लाइन में खड़े रहे।
जानकारी के मुताबिक, पहले महाकाल को शमशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है, जिसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बेटे तोशेंद्र देव साय ने परिवार के एक सदस्य के साथ बाबा महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में हिस्सा लिया। उन्होंने सुबह की इस रस्म में भाग लिया और आशीर्वाद मांगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *