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भरत तिवारी एनकाउंटर: बीजेपी पर बढ़ा राजनीतिक दबाव, ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर बढ़ी चिंता

पटना: भरत तिवारी कथित एनकाउंटर का मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस घटना को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, वहीं एनडीए के सहयोगी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इससे बीजेपी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

घटना के बाद सरकार ने न्यायिक जांच आयोग गठित किया, संबंधित पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया और छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसके बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और मामला लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है।

एलजेपी (रामविलास) प्रमुख Chirag Paswan ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता Ashok Choudhary ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि भरत तिवारी के पास मौजूद पिस्तौल असली थी या नकली।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में एनकाउंटर गलत साबित होता है तो इसका असर बीजेपी के ब्राह्मण वोट बैंक पर पड़ सकता है। कांग्रेस भी इसी सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश में है, क्योंकि कभी ब्राह्मण मतदाता उसका मजबूत आधार माने जाते थे।

हालांकि 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर उपचुनाव पर फिलहाल इस मामले का सीधा असर दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी के लिए ब्राह्मण मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

आशुतोष झा

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