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नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की तैयारी, चुनावी मैदान में पूर्व आर्मी चीफ

डेस्क: इजराइल के प्रधानमत्री बेंजामिन नेतन्याहू को देश की सत्ता से बेदखल करने की तैयारी की तैयारी की जा रही है. नेतन्याहू दिसंबर 2022 से लगातार इस पद पर बने हुए है, लेकिन आगामी चुनाव में उन्हें हटाने तैयारी है. नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट ने मंगलवार (30 जून ) को अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया है.
नई सेंट्रिस्ट पार्टी यशर के प्रमुख गादी आइजनकोट ने अपने चुनावी अभियान के दौरान एकजुट करने वाले नेता बनने का वादा किया और मौजूदा सरकार पर अराजकता पैदा करने का आरोप लगाते हुए उसे सत्ता से हटाने का वादा किया. उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ने की घोषणा की और शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से लेकर तमाम तरह के वादे किए.
‘इजराइल को जीतना चाहिए’ के नारे के साथ आइजनकोट ने आगामी चुनावों को इजराइल की सुरक्षा, एकता और आत्मा के लिए निर्णायक बताया. इस दौरान उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘आगामी अक्टूबर में उस भयानक अक्टूबर की सरकार का अंत हो जाएगा. हम इजराइल के इतिहास में एक नया और कहीं बेहतर अध्याय शुरू करेंगे. हम इसे मिलकर लिखेंगे’.
पूर्व IDF चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइजनकोट ने बेनी गैंट्ज़ की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी छोड़कर अपनी पार्टी बनाई है. उन्होंने इजराइल की परंपरा, विरासत और टोरा में निहित एक एकजुट करने वाले नेता बनने और सभी इजराइली नागरिकों का प्रधानमंत्री बनने का वादा किया.
हालांकि उन्होंने नेतन्याहू का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं जो फूट डालते हैं और ऐसे कदम उठाते हैं जो राष्ट्रीय हित के खिलाफ हैं. यह उन इजराइलियों के मुंह पर तमाचा है जो इस मातृभूमि के लिए काम करते हैं, सेवा करते हैं और अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं. आइजनकोट का इशारा सरकार के उस कानून की तरफ था.आइज़ेनकोट का यह बयान खास तौर पर उन विवादित प्रस्तावों की ओर इशारा माना जा रहा है जिनमें अति-रूढ़िवादी यहूदियों (हारेदी समुदाय) को सैन्य सेवा से छूट देने से जुड़े कदम शामिल हैं.

नेतन्याहू के हाल में दिए व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने के बयान पर पलटवार करते हुए आइजनकोट ने कहा ‘नेतृत्व राष्ट्रीय एकता शब्द का इस्तेमाल एक छलपूर्ण चुनावी अभियान के रूप में कर रहा है. मैं राष्ट्र को एकजुट करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा’.उन्होंने कहा कि उनका नेतृत्व इजराइल की परंपराओं, विरासत और मूल्यों पर आधारित होगा.
आइज़ेनकोट ने आरोप लगाया ‘यह एक ऐसा नेतृत्व है जिसके लिए ‘जवाबदेही’ और ‘व्यक्तिगत उदाहरण’ जैसे शब्द बेमानी हैं. यह झूठ बोलने वाला नेतृत्व है. मानो जिस अराजकता में हम जी रहे हैं, उसके अलावा कोई और रास्ता ही न हो, जो विभाजन को इस तरह बढ़ावा देता है मानो उसकी कोई कीमत ही न हो, जिसका शासन करने का एकमात्र तरीका हमें अलग करना है’.
आइजनकोट ने मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा,’यह एक ऐसा नेतृत्व है जिसके लिए ‘जवाबदेही’ और ‘व्यक्तिगत उदाहरण’ जैसे शब्द बेमानी हैं. यह झूठ बोलने वाला नेतृत्व है. मानो जिस अराजकता में हम जी रहे हैं, उसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है. यह विभाजन को बढ़ावा देता है जैसे इसकी कोई कीमत नहीं है. शासन का इसका एकमात्र तरीका हमें अलग करना है’. उन्होंने कहा ‘इस पागलपन को खत्म करना हमारा कर्तव्य है… क्योंकि इजराइल के पास फिर से गलती करने का विशेषाधिकार नहीं है. हम एक ऐसे नेतृत्व को बदलेंगे जिसमें दूरदृष्टि और रणनीति का अभाव है’.
आइजनकोट ने 7 अक्टूबर को हमास के नेतृत्व में हुए नरसंहार की जांच के लिए राज्य आयोग बनाने का वादा किया. हमास द्वारा किए गए इस हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था. उन्होंने कहा कि आयोग के निष्कर्षों का उपयोग अतीत से सीखने और भविष्य के लिए तैयारी करने के लिए किया जाएगा.
उन्होंने उत्तर और दक्षिण के पुनर्वास को भी अपने प्रमुख लक्ष्यों में से एक बताया और युद्ध के दौरान शारीरिक या मानसिक रूप से आहत हर व्यक्ति की देखभाल करने का संकल्प लिया. रिजर्व सैनिकों को राहत देते हुए उन्होंने कहा कि रिजर्व सेवा को साल में 50 दिन तक सीमित करेंगे. सेना का विस्तार कर सैनिकों और रिजर्व सैनिकों पर बोझ कम करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने हरेदी और अरब समुदायों को भी सैन्य और राष्ट्रीय सेवा में भर्ती करेंगे का वादा किया.
नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड की टुगेदर पार्टी के गठबंधन के दबाव के बीच आइजनकोट ने संकेत दिया कि वह किसी ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे जिसका नेतृत्व वह खुद न करें. उन्होंने पूछा ‘क्या हम सामाजिक विभाजन को स्वीकार कर अगली आपदा की ओर बढ़ेंगे, या हम ठीक होंगे और पुनर्निर्माण करेंगे?’. उन्होंने कहा कि इजराइल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती विभाजन को खत्म करना और देश को फिर से मजबूत बनाना है.

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