डेस्क:अयोध्या । राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर अयोध्या के साधु-संतों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संत समाज ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम के मंदिर से जुड़े इस प्रकरण ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है, इसलिए सरकार को जल्द से जल्द सच्चाई सामने लानी चाहिए। रामलला मामले के पूर्व पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें विश्वास है कि जांच के आधार पर जल्द उचित निर्णय लिया जाएगा। जिस तरह से जांच आगे बढ़ रही है, उस पर भरोसा रखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि राम मंदिर की व्यवस्था साधु-संतों को सौंपी जाए, ताकि मंदिर का संचालन पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो सके। महंत धर्मदास ने यह भी कहा कि अयोध्या में धार्मिक व्यवस्था से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चढ़ावे के धन के कथित गबन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है और जांच के दौरान एक-एक कर कई तथ्य सामने आ रहे हैं। अगले 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की तस्वीर साफ हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सनातन समाज ने राम मंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया है, इसलिए कुछ दिनों की जांच प्रक्रिया से धैर्य नहीं खोना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और सरकार को जल्द निर्णय लेकर सच्चाई सार्वजनिक करनी चाहिए।
महंत विष्णु दास ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही बयानबाजी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि यह आस्था से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गई है, जो उचित नहीं है। मैं सभी दलों से इस मामले पर राजनीति न करने की अपील करता हूं।
वहीं, वरुण दास महाराज ने कहा कि देशभर से लोगों के लगातार फोन आ रहे हैं और उनसे सवाल पूछे जा रहे हैं कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसा मामला कैसे सामने आया।
उन्होंने कहा कि जहां श्रद्धालु अधिक देर तक एक स्थान पर खड़े होकर दर्शन भी नहीं कर सकते, वहां इस तरह की घटना सामने आना बेहद गंभीर और शर्मनाक है। दोषियों की जल्द पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

