अहमदाबाद: अहमदाबाद में मिलावटी प्लाज्मा का धंधा करने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। जिले में सामने आए ब्लड प्लाज्मा में मिलावट के रैकेट की जांच कर रहे अधिकारियों को पता चला कि मुख्य आरोपी के घर से जब्त किए गए सभी 1,140 प्लाज्मा यूनिट मिलावटी, घटिया क्वालिटी के और इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं थे। इसके बाद अधिकारियों ने जब्त किए गए स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जांच का दायरा महाराष्ट्र के कई ब्लड बैंकों तक बढ़ा दिया है।
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने बताया कि बीजे मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी के घर से बरामद प्लाज्मा यूनिट्स, फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
रिपोर्ट में कहा गया है, “प्लाज्मा बहुत खराब क्वालिटी का था, इससे इंसानी जान को खतरा हो सकता था और यह ट्रांसफ्यूजन के लिए सही नहीं था।”
इन नतीजों के आधार पर जांचकर्ताओं का मानना है कि आरोपी ने जिसे असली प्लाज्मा बताकर बेचा था, उसमें भी चोरी के बाद मिलावट की गई थी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने असली प्लाज्मा यूनिट्स से अच्छी क्वालिटी का कुछ प्लाज्मा निकाल लिया और उसकी मात्रा को बनाए रखने के लिए बाकी बचे हिस्से में सलाइन वॉटर (नमक वाला पानी) मिला दिया, जिससे प्लाज्मा की क्वालिटी कम हो गई।
जब भी असली प्लाज्मा की नई खेप आती थी तो आरोपी उन्हें पहले से मिलावट किए गए प्लाज्मा यूनिट से बदल देते थे, ताकि सप्लाई की गई यूनिट्स की संख्या फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर के बराबर रहे।
जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि खेप से निकाले गए असली प्लाज्मा में भी महाराष्ट्र के दो ब्लड बैंकों को बेचने से पहले मिलावट की जाती थी, जिससे आरोपी मात्रा बढ़ा सकते थे और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सकते थे।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओम प्रकाश जाट ने बताया कि इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और आगे की पूछताछ से पता चला है कि आरोपियों ने न केवल बदले गए प्लाज्मा में, बल्कि चुराए गए असली प्लाज्मा में भी मिलावट की थी।
जाट ने कहा, “असली प्लाज्मा को नकली प्लाज्मा से बदलने और असली चुराने के बाद उन्होंने असली प्लाज्मा में भी मिलावट की। मिलावट के बाद, प्लाज्मा को महाराष्ट्र के दो ब्लड बैंकों में भेजा गया। ये वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक हैं। हमने इन दोनों ब्लड बैंकों के मालिकों को पकड़ लिया है।”
उन्होंने कहा, “अगर आगे की पूछताछ में पता चलता है कि यह प्लाज्मा सीधे किसी मरीज को चढ़ाया गया था या किसी दूसरे ब्लड बैंक को सप्लाई किया गया था तो उस पहलू की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में यह साबित होता है कि इसकी वजह से किसी मरीज की मौत हुई या कोई बीमार पड़ा तो मामले में और भी उचित धाराएं जोड़ी जाएंगी और और भी आरोपियों के नाम शामिल किए जाएंगे।”
लैब की जांच रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जाट ने कहा कि बीजे मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट से पता चला है कि आरोपी ने जो प्लाज्मा असली बताकर बेचा था, वह भी दूषित था।
उन्होंने कहा, “उसमें गंदगी/मिलावट थी और उस प्लाज्मा को सीधे किसी इंसान को नहीं चढ़ाया जा सकता था। न तो उसमें इलाज की कोई क्षमता थी और न ही वह साफ-सफाई के जरूरी मानकों को पूरा करता था।”
पुलिस ने बताया कि महाराष्ट्र में कई ब्लड बैंकों की भूमिका की जांच जारी है।
स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के मुताबिक, आरोपियों ने वाशिम और जालना के ब्लड बैंकों को प्लाज्मा सप्लाई किया था। साथ ही, अहमदनगर के अहमदनगर ब्लड बैंक, धुले के जीवनज्योति ब्लड बैंक, नासिक के संजीवनी ब्लड बैंक, भुसावल के धन्वंतरि ब्लड बैंक और छत्रपति संभाजीनगर के लायंस ब्लड बैंक में भी जांच-पड़ताल और पूछताछ चल रही है।
जांच करने वाले अधिकारी इन सेंटर्स के ऑपरेटर्स की संदिग्ध भूमिका की जांच कर रहे हैं। जाट ने कहा कि पुलिस हेल्थ डिपार्टमेंट, फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट, लैबोरेटरीज और गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ मिलकर काम कर रही है।
जांच करने वालों ने ब्लड बैंकों के लिए तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) हासिल कर लिए हैं और वे यह जांच रहे हैं कि तय नियमों का पालन किया गया या नहीं।
उन्होंने कहा, “अगर हमें पता चलता है कि किसी भी स्टेज पर तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तो हम सभी संबंधित विभागों को एक डिटेल्ड रिपोर्ट सौंपेंगे ताकि वे सही फैसला ले सकें। अगर भविष्य में एसओपी में किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है तो हमारी चल रही जांच उस प्रक्रिया में भी मदद करेगी।”
जांच में ब्लड बैंकों से जुड़े रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की भी पड़ताल की जा रही है, जिसमें क्वालिफिकेशन की जरूरतें, लाइसेंसिंग की प्रक्रियाएं और ब्लड बैंकों व फार्मास्युटिकल कंपनियों के बीच ब्लड प्लाज्मा की खरीद-बिक्री से जुड़े कानूनी प्रावधान शामिल हैं।
पुलिस ने कहा कि जांच के नतीजों से उन रेगुलेटरी कमियों का पता लगाने में मदद मिलेगी जिनका आरोपियों ने फायदा उठाया, और इससे ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सुझाव तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
जाट ने कहा कि मामला सामने आने के बाद से ही गुजरात स्वास्थ्य विभाग सक्रिय है और किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाने के लिए राज्य भर के ब्लड बैंकों की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि गुजरात के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा सप्लाई किया गया था।
इस मामले का खुलासा अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस की एसओजी ने खुफिया जानकारी के आधार पर किया। जांचकर्ताओं को एक ऐसे रैकेट का पता चला जो चांगोदर की एक फार्मास्युटिकल कंपनी के लिए भेजे जाने वाले ब्लड प्लाज्मा में मिलावट कर रहा था।
पुलिस का आरोप है कि फार्मास्युटिकल कंपनियों में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रह चुके दिनेश चौधरी ने अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करके ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों जितेंद्र सोलंकी और रफीक खलीफा के साथ मिलकर इस काम को अंजाम दिया। आरोप है कि ये कर्मचारी डिलीवरी से पहले ही प्लाज्मा की खेप को दूसरी जगह भेज देते थे।
जांचकर्ताओं का कहना है कि महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से इकट्ठा किए गए असली प्लाज्मा को खेप से निकाल लिया जाता था और फार्मास्युटिकल कंपनी तक पहुंचने से पहले उसकी जगह मिलावटी प्लाज्मा रख दिया जाता था।
जांच का दायरा बढ़ने पर महाराष्ट्र के रहने वाले चौथे आरोपी मोहन दाजीबा गायकवाड़ को भी गिरफ्तार किया गया।
चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(3), 338(2), 125, 276, 328(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1,140 ब्लड प्लाज्मा यूनिट, एक डीप फ्रीजर, केमिकल की बोतलें, एक सीलिंग मशीन, खाली प्लाज़्मा बैग और अपराध में इस्तेमाल की गई एक पिक-अप गाड़ी जब्त की।

