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खड़ी कार में अचानक खुला एयर बैग, युवक की मौत के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

ठाणे में खड़ी कार के भीतर अचानक एयर बैग खुलने से एक युवक की मौत का मामला सामने आने के बाद वाहन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जिस एयर बैग का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के दौरान चालक और यात्रियों की जान बचाना होता है, उसके बिना किसी दुर्घटना के सक्रिय होने की घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्लभ होती हैं, लेकिन इनके पीछे के तकनीकी कारणों की गहन जांच बेहद जरूरी है। कैसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार युवक एक पुराने चारपहिया वाहन में बैठा हुआ था। वाहन पूरी तरह खड़ा था और किसी प्रकार की सड़क दुर्घटना नहीं हुई थी। इसी दौरान अचानक कार का एयर बैग खुल गया। तेज गति से खुलने के कारण युवक को गंभीर चोट लगी और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के समय युवक ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, जिससे एयर बैग का पूरा दबाव सीधे उसके चेहरे और शरीर पर पड़ा।

बिना दुर्घटना के कैसे खुल सकता है एयर बैग

सामान्य परिस्थितियों में एयर बैग तभी सक्रिय होता है, जब वाहन में तेज टक्कर होती है और लगे हुए संवेदक दुर्घटना का संकेत देते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि खड़ी कार में बिना किसी दुर्घटना के एयर बैग कैसे खुल गया। विशेषज्ञ इसके पीछे कई संभावित तकनीकी कारण मान रहे हैं।

 

संवेदकों की गड़बड़ी बन सकती है वजह

वाहन में लगे संवेदक लगातार झटकों और टक्कर की निगरानी करते रहते हैं। यदि किसी कारणवश उन्हें असामान्य झटका महसूस हो जाए या वे गलत संकेत दर्ज कर लें, तो नियंत्रण प्रणाली एयर बैग को सक्रिय कर सकती है। यद्यपि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता।

नियंत्रण प्रणाली में तकनीकी खराबी

यदि वाहन काफी पुराना हो, तो उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नियंत्रण प्रणाली में समय के साथ खराबी आने की संभावना बढ़ जाती है। नियंत्रण प्रणाली में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर एयर बैग बिना वास्तविक दुर्घटना के भी खुल सकता है। यही कारण है कि पुराने वाहनों की समय-समय पर तकनीकी जांच कराना आवश्यक माना जाता है।

विद्युत तारों में खराबी भी हो सकती है कारण

वाहन की विद्युत व्यवस्था में आई खराबी भी ऐसी घटना की वजह बन सकती है। कई बार चूहों द्वारा तार काट दिए जाने, नमी, जंग लगने या अतिरिक्त उपकरण लगाते समय गलत जोड़ होने से विद्युत प्रवाह प्रभावित हो जाता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा प्रणाली को गलत संकेत मिल सकते हैं और एयर बैग अचानक सक्रिय हो सकता है।

 

कैसे काम करता है एयर बैग

आधुनिक वाहनों में एयर बैग विशेष संवेदकों से जुड़ा होता है। जैसे ही वाहन में गंभीर टक्कर होती है, संवेदक तुरंत नियंत्रण प्रणाली को संकेत भेजते हैं। इसके बाद कुछ ही क्षणों में गैस भरकर एयर बैग पूरी तरह खुल जाता है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ मिली सेकेंड में पूरी होती है और चालक या यात्री को वाहन के कठोर हिस्सों से टकराने से बचाती है।

एयर बैग सही स्थिति में है या नहीं, ऐसे करें पहचान

हर बार वाहन चालू करने पर उपकरण पटल पर एयर बैग से संबंधित चेतावनी संकेत कुछ क्षणों के लिए दिखाई देता है। यदि जांच पूरी होने के बाद यह संकेत स्वतः बंद हो जाए, तो इसका अर्थ है कि प्रणाली सामान्य रूप से काम कर रही है। लेकिन यदि चेतावनी संकेत लगातार जलता रहे या बार-बार दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत अधिकृत सेवा केंद्र पर वाहन की जांच करानी चाहिए।

स्वयं मरम्मत कराने से बचें

एयर बैग वाहन की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणालियों में शामिल है। इसमें किसी भी प्रकार की खराबी आने पर स्थानीय स्तर पर मरम्मत कराने के बजाय अधिकृत सेवा केंद्र की सहायता लेनी चाहिए। गलत तरीके से की गई मरम्मत भविष्य में गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

बैठने का तरीका भी है महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का कहना है कि सामने की सीट पर बैठने वाले यात्रियों को कभी भी अपने पैर अगले हिस्से पर नहीं रखने चाहिए। यदि किसी कारण से एयर बैग अचानक खुल जाए, तो उसकी तेज गति सीधे पैरों पर पड़ सकती है, जिससे गंभीर चोट या हड्डी टूटने जैसी स्थिति बन सकती है। इसी तरह वाहन में बैठते समय हमेशा सीट बेल्ट का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि एयर बैग और सीट बेल्ट दोनों मिलकर ही अधिकतम सुरक्षा प्रदान करते हैं।

नियमित जांच से कम हो सकता है खतरा

पुराने वाहनों में समय-समय पर एयर बैग, संवेदकों, नियंत्रण प्रणाली और विद्युत व्यवस्था की जांच कराना बेहद जरूरी है। यदि उपकरण पटल पर किसी प्रकार की चेतावनी दिखाई दे या वाहन की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित रखरखाव और समय पर जांच से इस प्रकार की दुर्लभ घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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