डेस्क: आंध्र प्रदेश की एक बुजुर्ग महिला ने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी है ताकि वह एक भारतीय के तौर पर अपनी आखिरी सांस ले सकें। 90 साल से ज्यादा उम्र की महिला ने अनुरोध किया कि उन्हें जल्द से जल्द भारतीय नागरिकता दी जाए, जिसके लिए वह ऑनलाइन आवेदन कर चुकी हैं।
बापटला जिले के कलेक्टर वी विनोद कुमार ने शुक्रवार को बताया कि के महालक्ष्म्मा नाम की महिला ने आंध्र प्रदेश में अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी और एक भारतीय नागरिक के तौर पर मरने की इच्छा जाहिर की। 94 साल की महालक्ष्मीम्मा दो दशक से ज़्यादा समय तक अमेरिका में रही थीं।
कलेक्टर विनोद कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘वह अपने आखिरी दिन अपने देश और अपने गांव में बिताना चाहती थीं और उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार वहीं हो। यह बहुत भावुक पल था।’ बापटला जिले के चिंतागुंपला गांव की रहने वाली महालक्ष्म्मा अपने पति नागभूषणम की मौत के बाद अमेरिका चली गई थीं ताकि वह अपने बेटे के साथ रह सकें। उनके बेटे कैंसर स्पेशलिस्ट (Oncologist) हैं।
महिला ने जुलाई, 2000 में अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी
महालक्ष्म्मा ने 27 जुलाई, 2000 को अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी। वह कई साल अमेरिका रहीं और साल 2018 में अपने परिवार के साथ भारत लौट आईं थीं। कलेक्टर कुमार ने बताया कि उनके बेटे, कोंड्रुगुंटा के पिच्चैया अब गुंटूर के NRI मेडिकल कॉलेज में डायरेक्टर हैं और तब से यह परिवार अपने पैतृक गांव में रह रहा है। महालक्ष्म्मा ने 1 जून को अपनी भारतीय नागरिकता बहाल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। मंगलवार को इस अर्जी पर जांच शुरू की गई क्योंकि उन्होंने अपनी नागरिकता के अधिकार बहाल करने की मांग को लेकर राज्य सचिवालय से भी संपर्क किया था।
बुजुर्ग महिला ने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली
कलेक्टर ने बताया कि भारतीय नागरिकता पाने के इच्छुक हर व्यक्ति को नागरिकता कानून के तहत, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (जो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट भी होते हैं) के सामने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी होती है। चूंकि, महालक्ष्म्मा को सुनने में काफी दिक्कत थी और उन्हें अंग्रेजी समझ नहीं आती थी इसलिए शपथ का अनुवाद तेलुगु में किया गया। उनके बेटे ने उन्हें तेलुगु अनुवाद पढ़कर सुनाया और उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर-सह-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के सामने उसे दोहराया जिसमें बुजुर्ग महिला ने भारत के संविधान का सम्मान करने और उसके कानूनों का पालन करने का संकल्प लिया।
महिला का फॉर्म गृह मंत्रालय भेजा गया
विनोद कुमार ने कहा, ‘शपथ दिलाने के बाद, मैंने फॉर्म III और फॉर्म VII पर हस्ताक्षर किए और उन्हें गृह मंत्रालय को भेज दिया। इस प्रक्रिया में मेरी भूमिका पूरी हो गई है। नागरिकता देने और सर्टिफिकेट जारी करने का अंतिम फैसला मंत्रालय का है।’ उन्होंने बताया कि आवेदन के लिए आवेदक को जानने वाले किसी भारतीय नागरिक के सर्टिफिकेशन की भी ज़रूरत थी जो उनके एक रिश्तेदार ने दिया था। जांच के दौरान महालक्ष्म्मा ने अनुरोध किया कि उन्हें बुढ़ापे में भारत में रहने का कानूनी अधिकार दिया जाए।
कलेक्टर कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट पहले राज्य सचिवालय भेजी जाएगी, जहां से इसे आगे की कार्रवाई के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि उन्होंने महालक्ष्म्मा को बताया कि तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सरकार से भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

