दरभंगा बिहार रोजगार स्थानीय

मैथिली में रोजगार की असीम संभावनाएँ, भाषा कल्पवृक्ष के समान : डॉ. अरविंद कुमार सिंह झा

दरभंगा। (सुरज ठाकुर) ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के मैथिली विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण की अध्यक्षता में “मैथिली में रोजगार की संभावना” विषय पर एक विशेष अकादमिक एकल व्याख्यान एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आर.के. कॉलेज, मधुबनी के प्राध्यापक एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. अरविंद कुमार सिंह झा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। इस अवसर पर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

अपने व्याख्यान में डॉ. अरविंद कुमार सिंह झा ने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि रोजगार, ज्ञान और सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त माध्यम है। उन्होंने मैथिली को कल्पवृक्ष की संज्ञा देते हुए कहा कि इसके माध्यम से शिक्षा, शोध, अध्यापन, अनुवाद, पत्रकारिता, प्रकाशन, डिजिटल मीडिया, सांस्कृतिक प्रबंधन तथा प्रशासनिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने युवाओं से भाषा और साहित्य को केवल भावनात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि व्यावसायिक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण से भी देखने का आह्वान किया।

प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रथम वर्ग से दशम वर्ग तक मैथिली माध्यम में विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। यदि इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तो शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। मातृभाषा में शिक्षा विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता, बौद्धिक विकास तथा सृजनात्मक सोच को सुदृढ़ बनाती है।

डॉ. झा ने कहा कि संविधान की अष्टम अनुसूची में मैथिली के शामिल होने के बाद इस भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हुई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सहित अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में मैथिली वैकल्पिक विषय के रूप में स्वीकृत है। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा के स्तर तक मैथिली के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मैथिली विषय के अनेक विद्यार्थी शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का प्रमाण है।

उन्होंने प्रकाशन, पुस्तक लेखन, संपादन और अनुवाद को रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि डिजिटल युग में क्षेत्रीय भाषाओं की सामग्री की मांग निरंतर बढ़ रही है। साहित्य अकादमी, भारतीय भाषा संस्थान तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा संचालित अनुवाद परियोजनाओं में दक्ष अनुवादकों की आवश्यकता बनी रहती है। मैथिली के विद्यार्थियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है।

न्यायिक क्षेत्र में मैथिली की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय तक मैथिली में आवेदन देने और अपना पक्ष रखने की व्यवस्था उपलब्ध है। हालांकि इसका प्रभावी क्रियान्वयन अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सका है। उन्होंने मैथिली के व्यवहारिक उपयोग को बढ़ाने के लिए सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल की आवश्यकता बताई।

अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सरकारी नौकरियों तक ही अपने लक्ष्य को सीमित नहीं रखना चाहिए। स्वरोजगार, शोध, लेखन, संपादन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, लोकसंस्कृति संरक्षण तथा भाषा-आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, निरंतर शोध तथा नवाचारी दृष्टिकोण के माध्यम से मैथिली भाषा का विकास और युवाओं का भविष्य दोनों सशक्त हो सकते हैं।

इस अवसर पर आर.के. कॉलेज, मधुबनी के शिक्षक प्रमोद कुमार पासवान द्वारा संपादित पुस्तक ‘निबंध मंजरी’ का लोकार्पण भी किया गया। पुस्तक का लोकार्पण विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण, मैथिली विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा, प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार मेहता तथा अन्य विद्वानों के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। वक्ताओं ने पुस्तक को विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए इसके प्रकाशन पर संपादक को बधाई दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमोद कुमार पासवान द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण जानकी वंदना से हुआ। इस अवसर पर मैथिली विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक सुरेश पासवान तथा सहायक प्राध्यापक अभिलाषा कुमारी ने भी अपने विचार रखे और विद्यार्थियों को भाषा एवं साहित्य के विविध आयामों से परिचित कराया।

कार्यक्रम में शोधार्थी पवन कुमार महतो, मनोज कुमार, मनीष कुमार, शिवम कुमार झा, राहुल राज गुप्ता, प्रियंका कुमारी, प्रवीण कुमार, मनोज कुमार पंडित, नेहा कुमारी, मिथिलेश कुमार साहनी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। विभागीय कर्मचारी नरेन्द्र कुमार की भी सक्रिय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन शोधार्थी राजनाथ पंडित द्वारा किया गया। अंत में उपस्थित प्रतिभागियों ने मैथिली विभाग द्वारा आयोजित इस ज्ञानवर्धक व्याख्यान एवं लोकार्पण समारोह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भाषा के शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा व्यावसायिक पक्षों से जोड़ते हैं और उन्हें भविष्य की नई संभावनाओं के प्रति प्रेरित करते हैं।

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