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ओडिशा : 8 पुलिसकर्मियों से घर का काम कराने और एक पुलिस कांस्टेबल की संदेहास्पद मौत मामले में, ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार को सीएम ने किया सस्पेंड।

डेस्क: ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार इन दिनों एक बड़े विवाद के कारण चर्चा में हैं. जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की मौत के बाद उनके परिवार ने गंगवार पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.

जांच के दौरान कई नए खुलासे सामने आए, जिसके बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दयाल गंगवार को निलंबित करने का आदेश दे दिया है. कभी राज्य के सबसे प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों में गिने जाने वाले गंगवार आज खुद जांच के दायरे में हैं.

 

1998 बैच के हैं IPS दयाल गंगवार

 

दयाल गंगवार 1998 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले गंगवार को ओडिशा कैडर मिला था. 28 दिसंबर 1998 को उन्होंने IPS अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की और लगभग तीन दशक तक पुलिस विभाग में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं.

 

अपने करियर के दौरान उन्होंने जिले स्तर से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. उन्हें पुलिस आधुनिकीकरण, संचार व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन का अनुभवी अधिकारी माना जाता रहा है. बेहतर सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से भी सम्मानित किया जा चुका है.

 

केंद्र सरकार में भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी

 

दयाल गंगवार साल 2020 से 2023 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे. इस दौरान उन्होंने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के रूप में काम किया. उन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी. साल 2023 में ओडिशा लौटने के बाद उन्हें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद पर प्रमोशन मिला और रेलवे एवं तटीय सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई.

 

लगातार ट्रांसफर ने भी खींचा था ध्यान

 

ओडिशा लौटने के बाद दयाल गंगवार का कार्यकाल काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. पहले उन्हें ADGP रेलवे एवं तटीय सुरक्षा बनाया गया, फिर ADGP पुलिस मुख्यालय भेजा गया. इसके बाद दोबारा रेलवे एवं तटीय सुरक्षा और फिर पुलिस मुख्यालय में पोस्टिंग मिली. साल 2025 में उन्हें ADGP कम्युनिकेशन बनाया गया. इतने कम समय में लगातार कई बड़े तबादले होने से पुलिस और प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी. हालांकि उस समय किसी आधिकारिक कारण की जानकारी नहीं दी गई थी.

 

विवाद की शुरूआत 

 

दरअसल, 7 मई 2026 को भुवनेश्वर के बलियंता थाना क्षेत्र के भिंगारपुर-काजा इलाके में जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार, एक महिला ने आरोप लगाया था कि सड़क दुर्घटना के बाद कांस्टेबल ने उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी. इसके बाद भीड़ ने स्वैन को खंभे से बांधकर हमला कर दिया. इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया और मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया.

 

परिवार ने लगाए मानसिक उत्पीड़न के आरोप

 

सौम्य रंजन स्वैन के परिवार ने आरोप लगाया कि उस समय ADGP कम्युनिकेशन रहे दयाल गंगवार उन्हें लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे. परिवार का कहना था कि स्वैन से पुलिस ड्यूटी के बजाय निजी और घरेलू काम करवाए जाते थे, जिससे वह लगातार तनाव में रहते थे. परिवार ने सरकार से मांग की कि गंगवार की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो.

 

8 पुलिसकर्मियों से घर के काम कराने का आरोप

 

जांच के दौरान गृह विभाग की रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, दयाल गंगवार ने सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना 8 GRP पुलिसकर्मियों को अपने सरकारी आवास पर घरेलू काम के लिए तैनात कर रखा था. बताया गया कि ये पुलिसकर्मी सरकारी ड्यूटी करने के बजाय अधिकारी के निजी काम करते थे. यह भी आरोप लगा कि उनका रेलवे एवं तटीय सुरक्षा विभाग से तबादला होने के बाद भी इन पुलिसकर्मियों की तैनाती जारी रही.

 

OSD बनाए गए और फिर शुरू हुई जांच

 

विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने दयाल गंगवार को ADGP कम्युनिकेशन पद से हटाकर गृह विभाग में विशेष कार्याधिकारी (OSD) नियुक्त कर दिया. इसके बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) अरुण बोथरा को मामले की जांच सौंपी गई. उन्हें यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई कि क्या स्वैन से निजी काम करवाए गए थे और क्या मानसिक उत्पीड़न का उनकी मौत से कोई संबंध था.

 

डायरी भी बनी जांच का अहम हिस्सा

 

जांच टीम ने सौम्य रंजन स्वैन के गांव जाकर परिवार से मुलाकात की और सौम्य रंजन द्वारा लिखी गई उनकी प्राइवेट डायरी को अपने कब्जे में लिया. जांच अधिकारियों ने डायरी में दर्ज तनाव और निजी टिप्पणियों का अध्ययन किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या नौकरी का दबाव उनकी मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा था. बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट पिछले महीने पुलिस महानिदेशक को सौंप दी गई थी और इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने निलंबन का फैसला लिया.

 

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

 

बीजू जनता दल (BJD) ने भी इस मामले में कई सवाल उठाए. पार्टी का दावा था कि दयाल गंगवार और सौम्य रंजन स्वैन एक-दूसरे को पहले से जानते थे और स्वैन को आधिकारिक पुलिस ड्यूटी की जगह गंगवार के घर और जिम में काम करने के लिए लगाया जाता था. इन आरोपों के बाद मामले की राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई.

 

अब तक की कार्रवाई 

 

इस पूरे मामले में राज्य सरकार पहले ही चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर चुकी है. दो होमगार्ड को सेवा से हटा दिया गया है और बलियंता थाने के इंस्पेक्टर इनचार्ज का भी ट्रांसफर किया गया है. पुलिस अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.

फैसले का इंतजार

 

दयाल गंगवार का लगभग 28 साल का पुलिस करियर अब एक गंभीर जांच के दौर से गुजर रहा है. एक ओर उन्हें लंबे समय तक सक्षम और अनुभवी अधिकारी माना जाता रहा है, वहीं दूसरी ओर सौम्य रंजन स्वैन मामले में लगे आरोपों ने उनकी छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

 

अब सबकी नजर क्राइम ब्रांच की आगे की जांच और सरकार के अगले फैसले पर टिकी है. जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि यह मामला केवल आरोपों तक सीमित रहता है या फिर इसके आधार पर आगे कोई कानूनी कार्रवाई भी होती है.

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