दरभंगा:महाराजा कामेश्वर सिंह द्वारा 1934 में बनवाया गया ऐतिहासिक दरभंगा किला का दिवार जिसे रामबाग किला के नाम से भी जाना जाता है, आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। मिथिला संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाले इस किले के परिसर में नियमों को ताक पर रखकर ऊंची इमारत का निर्माण किया जा रहा है।
85 एकड़ में फैला यह किला लाल ईंटों से बनी 1 किलोमीटर लंबी दीवार के लिए मशहूर है। कभी दरभंगा राज परिवार का आलीशान निवास रहा यह किला आज संरक्षित स्मारक की श्रेणी में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि किले की खूबसूरती और मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर परिसर के अंदर ही नई इमारत खड़ी की जा रही है।
लोगों का कहना है कि दानवीर महाराजा कामेश्वर सिंह ने देश-विदेश में दान देकर मिथिला का नाम रोशन किया, लेकिन आज उन्हीं की बनवाई विरासत पर दाग लगाने का काम हो रहा है। “धरोहर को धरोहर ही रहने दिया जाए। सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए,” एक स्थानीय निवासी ने कहा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियमों के मुताबिक संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है और 300 मीटर तक ASI की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति निर्माण करना प्राचीन संस्मारक अधिनियम 1958 का उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से मांग की है कि अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए। नियम के अनुसार जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो ताकि मिथिला की यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
“इस धरोहर को मिटाने का काम अब और न हो,” लोगों ने एक स्वर में कहा।

