डेस्क:जिस एनसीपीआई का रविवार से पहले तक ज्यादातर लोगों ने नाम तक नहीं सुना था वह तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के शामिल होने से अचानक पश्चिम बंगाल से लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर रातों-रात सुर्खियों में आ गई है.तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने एनसीपीआई जैसी उस पार्टी को चुना जिसके पास कोई जनप्रतिनिधि नहीं है. इस फैसले से राजनीतिक हलकों में भारी हैरत है. इन सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने के बाद केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए को समर्थन देने की बात कही है.तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के समर्थन से ही तृणमूल में बगावत हुई है. लेकिन बीजेपी ने इस पार्टी की अंदरुनी कलह का नतीजा बताते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में लोगों का पार्टी छोड़ना तृणमूल के भीतर गहरी निराशा और वैचारिक शून्यता का सबूत है.
तृणमूल कांग्रेस में बगावत की शुरुआत विधायकों से हुई थी. पार्टी के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों के बगावत के बाद विधानसभा में उसे अलग गुट के तौर पर मान्यता मिल गई थी. लोकसभा सांसदों की बगावत के बाद भी माना जा रहा था कि दो-तिहाई से ज्यादा सांसद खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए मान्यता देने की मांग करेंगे. इसके अलावा उनके सीधे बीजेपी में शामिल होने के भी कयास लगाए जा रहे थे. जरूरी संख्या होने के कारण उनके खिलाफ दलबदल कानून लागू नहीं होता

