नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय का दावा किया है। इतना ही नहीं, इन सांसदों ने केंद्र की सत्तारूढ़ NDA सरकार को समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनका समूह अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी का हिस्सा बन चुका है और संसद में नई राजनीतिक दिशा के साथ आगे बढ़ेगा। वहीं वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने संकेत दिए कि टीएमसी के नाम और पहचान को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उनका कहना है कि अंतिम फैसला अदालत करेगी कि असली टीएमसी किसे माना जाए।
इस घटनाक्रम से टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि किसी भी अलग गुट को टीएमसी के रूप में मान्यता न दी जाए। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि टीएमसी एक एकीकृत और अविभाज्य राजनीतिक दल है तथा उसका संसदीय दल उसी संगठन का हिस्सा है।
यदि स्पीकर बागी सांसदों के विलय को मंजूरी दे देते हैं, तो लोकसभा में टीएमसी की संख्या में बड़ी कमी आ सकती है। इससे न केवल पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर होगी, बल्कि विपक्षी गठबंधन के राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह नई रणनीतियों और गठबंधनों का रास्ता खोल सकता है।
गौरतलब है कि 1998 में ममता बनर्जी द्वारा स्थापित तृणमूल कांग्रेस ने पिछले तीन दशकों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में 20 सांसदों की संभावित बगावत को पार्टी के इतिहास की सबसे बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है।
आशुतोष झा

