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कार्यशाला छात्रों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का महत्वपूर्ण मध्यम : प्रो लवण कीर्ति

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के संगीत एवं नाट्य विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय रंगमंचीय कार्यशाला कहानी और रंगमंच के चौथे दिन प्रतिभागियों ने आगामी नाट्य प्रस्तुति कफ़न के पूर्वाभ्यास में पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भाग लिया। कार्यशाला में प्रशिक्षक कुंदन कुमार के निर्देशन में विद्यार्थियों ने नाटक के विभिन्न दृश्यों,संवादों, भाव-भंगिमाओं,मंचीय गतिविधियों का गहन अभ्यास किया। चौथे दिन का मुख्य केन्द्र बिन्दु प्रेमचन्द की कालजयी कहानी कफ़न पर आधारित नाट्य प्रस्तुति की तैयारी रहा। कलाकारों को पात्रों की मानसिक अवस्था, उनके सामाजिक परिवेश, कथा की संवेदनात्मक गहराई को समझने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक ने कलाकारों को यह बताया किसी भी नाटक की सफलता केवल संवादों के सही उच्चारण में नहीं, बल्कि पात्रों के भावों और उनकी आंतरिक मनःस्थिति को मंच पर सजीव रूप से प्रस्तुत करने में निहित होती है।

अभ्यास सत्र में नाटक के महत्वपूर्ण दृश्यों का बार-बार मंचन कराया गया। जिससे कलाकार अपने पात्रों के साथ अधिक आत्मीयता स्थापित कर सकें। इस दौरान मंच अनुशासन,प्रवेश निकास,संवाद अदायगी, देह-भाषा,स्वर-संयोजन, सामूहिक अभिनय की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया। विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला की संयोजक प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने कहा इस प्रकार की कार्यशालाए विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आशा व्यक्त किया की कार्यशाला के समापन दिवस पर प्रस्तुत किया जाने वाला नाटक दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ेगा। 8 जून से प्रारंभ हुई इस पाँच दिवसीय कार्यशाला का समापन 12 जून को होगा। प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई नाट्य प्रस्तुति “कफ़न” का मंचन किया जाएगा।

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