डेस्क:भारतीय वायुसेना (IAF) की युद्धक क्षमता को मजबूत करने वाली सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक—’तेजस मार्क 1ए’ लड़ाकू विमान—की आपूर्ति में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा की जा रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। रक्षा मंत्री ने सरकारी एयरोस्पेस कंपनी HAL द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही सभी प्रमुख परियोजनाओं के प्रदर्शन की व्यापक और गहन समीक्षा की। बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) रवि कोटा शामिल हुए। ऐसा बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्री सिंह ने एचएएल के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक समयसीमा तय की जानी चाहिए। मामले से अवगत अधिकारियों ने बताया कि तेजस मार्क 1ए विमानों की आपूर्ति में देरी के संदर्भ में सिंह ने सुझाव दिया कि एचएएल और भारतीय वायुसेना लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए बैठकर बात करें।
विमानों की आपूर्ति में इसलिए भी देरी हुई है क्योंकि भारतीय वायुसेना ने कहा है कि निर्मित विमान कुछ तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करते। विमानों की आपूर्ति में देरी का एक प्रमुख कारण यह भी रहा कि जीई एयरोस्पेस ने इन विमानों को शक्ति देने वाले इंजनों की आपूर्ति समयसीमा में नहीं की। अमेरिका की रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अब तक छह इंजन आपूर्ति कर चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि एचएएल कम से कम 18 तेजस मार्क 1ए विमानों का उत्पादन पूरा कर चुका है और यदि एयरोस्पेस कंपनी को आवश्यक इंजन मिल जाते हैं, तो इन सभी विमानों की आपूर्ति इस वर्ष भारतीय वायुसेना को किए जाने की उम्मीद है।

