डेस्क:शनिवार रात दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच-मंजिला इमारत ढहने से छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने कई परिवारों को उम्र भर का गम दिया है, लेकिन इनमें एक नाम ऐसा भी है जिसकी शहादत पर पूरा छात्र समुदाय आंसू बहा रहा है। वह नाम है ‘पार्वती ओझा’ का, जो हादसे के वक्त खुद भागने के बजाय वहां मौजूद छात्रों की जान बचा रही थीं। मूल रूप से नेपाल की रहने वाली पार्वती पिछले दो दशकों से दिल्ली में रह रही थीं। वह ढही हुई इमारत के ठीक बगल में एक छोटी सी कैंटीन चलाती थीं। घर से दूर दिल्ली में पढ़ाई या नौकरी की तलाश में आए अनगिनत युवाओं के लिए वह सिर्फ एक कैंटीन मालकिन नहीं, बल्कि एक माँ जैसी थीं, जो उन्हें न सिर्फ किफायती खाना खिलाती थीं बल्कि सुख-दुख में उनका संबल भी बनती थीं।

