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CJP संस्थापक का दावा! पर्सनल इंस्टा अकाउंट हैक, बैकअप पेज भी हुआ ब्लॉक, सोशल मीडिया पर बढ़ी डिजिटल ‘कॉकरोच’ आंदोलन की रार

डेस्क:सोशल मीडिया पर अपनी जबरदस्त और अप्रत्याशित लोकप्रियता से देश की राजनीति में हलचल मचाने वाली व्यंग्यात्मक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अब अपने पर्सनल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई का आरोप लगाया है। दिपके का दावा है कि उनका निजी इंस्टाग्राम (Instagram) अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया है, जिसे वे अब एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, पार्टी के तेजी से बढ़ते बैकअप इंस्टाग्राम पेज को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, हालांकि कुछ घंटों के बाद उसे फिर से बहाल कर दिया गया। सुरक्षा के नाम पर लॉक हुआ अकाउंट, रिकवरी फेल
अभिजीत दिपके द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, उन्होंने मेटा (Meta) की रिकवरी प्रक्रिया के जरिए अपने पर्सनल अकाउंट को वापस पाने की कई बार कोशिश की। लेकिन हर बार जब वे “अभी रिकवर करें” (Recover it now) विकल्प पर क्लिक करते, तो स्क्रीन पर एक ही संदेश आता: “हमने आपकी सुरक्षा के लिए आपका Instagram अकाउंट लॉक कर दिया है। अपने अकाउंट को वापस पाने के लिए, आपको अपनी पहचान वेरिफ़ाई करनी होगी और एक नया पासवर्ड बनाना होगा।”

बार-बार प्रयास करने के बाद भी सफलता न मिलने पर दिपके ने एक्स (पहले ट्विटर) पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “कॉकरोच जनता पार्टी पर कार्रवाई। इंस्टाग्राम पेज हैक हो गया। मेरा निजी इंस्टाग्राम हैक हो गया। ट्विटर अकाउंट रोक दिया गया। बैकअप अकाउंट भी बंद कर दिया गया।”

“Cockroach Is Back”: एक्स हैंडल सस्पेंड होने के बाद की जोरदार वापसी

यह नया विवाद CJP के एक्स (X) हैंडल को भारत में रोके जाने (सस्पेंड होने) के ठीक बाद सामने आया है। हालांकि, इस पाबंदी के बावजूद यह डिजिटल ग्रुप जल्द ही “Cockroach Is Back” नाम से एक नए अकाउंट के साथ प्लेटफॉर्म पर लौट आया।

नए अकाउंट से अपने आलोचकों पर तंज कसते हुए CJP ने लिखा, “क्या आपको लगा कि आप हमसे छुटकारा पा सकते हैं? हाहा (Lol)।” पार्टी ने संकेत दिया कि उनकी असाधारण और बढ़ती लोकप्रियता को चुप कराने के लिए ये सुनियोजित कोशिशें की जा रही हैं।

महज कुछ दिनों में BJP और 141 साल पुरानी कांग्रेस को पछाड़ा
जो अभियान कुछ दिनों पहले सिर्फ एक इंटरनेट व्यंग्य (Satire) के रूप में शुरू हुआ था, वह अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल आंदोलनों में बदल चुका है। CJP ने लॉन्च होने के चंद दिनों के भीतर इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पहले सत्तारूढ़ दल भाजपा (BJP) को और फिर 141 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी को पीछे छोड़ दिया।

क्यों मिल रहा है युवाओं का इतना साथ?
Gen Z और मीम्स की ताकत: इस आंदोलन की रीढ़ देश की युवा पीढ़ी (Gen Z) और इंटरनेट मीम्स हैं। परीक्षा के पेपर लीक (जैसे NEET विवाद), बेरोजगारी और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर युवाओं के भीतर चल रहे गुस्से को इस मंच ने अपनी आवाज बनाया है।

CJP पर लगते आरोप और विपक्ष का समर्थन
इस अचानक आई डिजिटल सुनामी ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है:

आरोप: भाजपा समर्थकों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस संगठन को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा” बताते हुए इसके तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और विपक्षी दलों की मिलीभगत से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं।

समर्थन: दूसरी तरफ, कई प्रमुख विपक्षी नेताओं, एक्टिविस्टों और मशहूर हस्तियों ने खुले तौर पर CJP का समर्थन किया है, जिससे सत्तारूढ़ दल पर उनके राजनीतिक हमले और तेज हो गए हैं।

कैसे हुई इस ‘अनोखे’ आंदोलन की शुरुआत?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके बोस्टन में रहने वाले एक पूर्व सोशल मीडिया कैंपेन वर्कर हैं, जो 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के डिजिटल कैंपेन से भी जुड़े रहे थे।

यह पूरा आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के एक कथित विवादित बयान के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन पर आरोप लगा कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्टों की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से की थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था, लेकिन तब तक इंटरनेट पर विरोध की चिंगारी भड़क चुकी थी।

CJP का मूल मंत्र:
“धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, आलसी” के नारे के साथ चलने वाली यह पार्टी खुद को “युवाओं का, युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए बनाया गया एक राजनीतिक मोर्चा” बताती है। इनके व्यंग्यात्मक घोषणापत्र में चुनावी सुधार, संस्थागत जवाबदेही, महिलाओं के लिए आरक्षण और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसी गंभीर मांगें भी शामिल हैं। आगे की राह:
सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बार-बार लग रही पाबंदियों के बीच CJP के फॉलोअर्स का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या यह इंटरनेट-आधारित विरोध अभियान भविष्य में किसी औपचारिक राजनीतिक दल का रूप लेता है या सिर्फ एक डिजिटल प्रेशर ग्रुप बनकर रह जाता है। लेकिन एक बात साफ है कि इस डिजिटल ‘कॉकरोच’ ने भारत की ऑनलाइन राजनीति का नैरेटिव जरूर बदल दिया है।

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