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राज दरभंगा के दो महाराजाओं को दिल्ली विधानसभा कैंलेडर शताब्दी यात्रा में जगह मिलने से राज दरभंगा और मिथिला हो रहा गौरवान्तीत आजादी पूर्व के राष्ट्रवादीयों के योगदान को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में दिल्ली विधानसभा की सराहनीय कदम समस्त मिथिला एवं बिहारवासी इस प्रयास की करते है सराहना

दरभंगा। देश की राजधानी कही जाने वाली दिल्ली के दिल्ली विधानसभा की ओर से प्रकाशित होने वाली ‘शताब्दी यात्रा’ नामक कॉफी टेबल बुक में इस बार दरभंगा महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह व रमेश्वर सिंह को जगह दी गई है। इस खास अवसर पर दरभंगा राज परिवार के सदस्य व कामेश्वर धार्मिक न्यास ट्रस्ट के ट्रस्टी,महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह के पौत्र कुमार कपिलेश्वर सिंह ने दिल्ली विधानसभा, अध्यक्ष,विजेन्द्र गुप्ता से की मुलाक़ात और उन्हें वरिष्ठ इतिहासकार तेजकर झा द्वारा लिखी गई पुस्तक राज दरभंगा भेंट किया। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने ट्रस्टी कुमार कपिलेश्वर सिंह को विधानसभा द्वारा प्रकाशित वार्षिक कैलेंडर,टेबल कैलेंडर, डायरी और ‘शताब्दी यात्रा’ नामक कॉफी टेबल बुक की प्रति भेंट किया गया। बताते चले की दरभंगा के इन दोनों महाराजाओं ने ब्रिटिशकाल में राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ कानून बनाने के कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह 1894 से 1898 तक इम्पीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य भी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई स्कूल,कॉलेज, अस्पताल बनवाए। कौंसिल में रहते हुए उन्होंने भारतीयों के हितों की मुखर वकालत की और ब्रिटिश नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। कलकत्ता विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को भी उन्होंने उदार दान दिया। महाराजा रमेश्वर सिंह भी वर्ष 1898 से 1908 तक इम्पीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में संस्कृत शिक्षा के लिए कई संस्थान स्थापित किए। कौंसिल में वे हमेशा भारतीय परंपराओं, स्वदेशी उद्योगों के पक्षधर हमेशा रहे। उनके राष्ट्रहित में योगदानों को देखते हुए उन्हें महाराजाधिराज की उपाधि मिली थी। उन्होंने भारत में कई भव्य भवनों का निर्माण करवाय थे। उद्योग को बढ़ावा देने में इनका बहुमूल्य योगदान है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कुमार को आगामी 28 मई को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए भी आमंत्रित किया। दिल्ली विधानसभा का यह प्रयास स्वतंत्रता से पूर्व विधायी संस्थाओं में राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में सराहनीय कदम है। हम समस्त मिथिला, बिहार वासी इस प्रयास की सराहना करते हैं।

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