पॉलीमर के बिना आधुनिक मानव जीवन असंभव, पर स्मार्ट पॉलीमर से होगा हमारा भविष्य उज्ज्वल- डॉ. विवेकानन्द

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्त्वावधान में “पॉलीमर : कल, आज और कल” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन विश्वविद्यालय रसायनशास्त्र विभाग के सभागार में विभागाध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में एमआर महिला कॉलेज, दरभंगा के पूर्व रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ विवेकानन्द झा, विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया- विशिष्ट वक्ता, वरीय प्राध्यापक प्रो संजय कुमार चौधरी, डॉ अभिषेक राय, डॉ सोनू राम शंकर, डॉ अनिन्द्र शर्मा, डॉ मुकेश कुमार शर्मा तथा फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा सहित 80 से अधिक शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

डॉ. विवेकानन्द झा ने पॉलीमर का इतिहास, प्रकार, महत्त्व, सदुपयोग एवं दुरुपयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छोटे-छोटे अणुओं का जुड़कर बड़े अणु के निर्माण से पॉलीमर बनता है, जिसके बिना आधुनिक मानव जीवन असंभव है, पर स्मार्ट पॉलीमर से हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा, क्योंकि इसका दोबारा प्रयोग भी होगा, प्रदूषण नहीं फैलाएगा तथा यह बायोडिग्रेडेबल भी होगा। यदि हम पॉलीमर का विवेकपूर्ण उपयोग करें तो यह हानिकारक नहीं होगा। कहा कि 19वीं सदी में विकसित पॉलीमर का द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद प्रयोग में काफी वृद्धि हुई। उन्होंने उन्होंने नैनो पॉलीमर एवं स्मार्ट पॉलीमर के गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में छात्र-छात्राओं के लिए रोजी-रोजगार की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

डॉ. आरएन चौरसिया ने कहा कि पॉलीमर आधुनिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण देन है जो मानव जीवन को सरल, सुविधाजनक एवं उन्नत बनाया है, परंतु इनके अत्यधिक प्रयोग से पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं। पॉलीमर से बनी वस्तु में हल्की, सस्ती, मजबूत एवं जंगरोधी होती हैं, जिनका उपयोग उद्योग, चिकित्सा, परिवहन, वस्त्र, फर्नीचर, खिलौने एवं घरेलू वस्तुओं में व्यापक रूप से होता है।
फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने पॉलीमर के लाभ एवं हानियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य में इसके वेस्टेज से क्वांटम डॉट का निर्माण कर अत्यधिक बिजली का उत्पादन संभव है। कहा कि पॉलीमर से बनी वस्तु में हल्की, पर मजबूत होती हैं, जिस कारण वाहनों, हेलमेट, विद्युत उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों, पाइप, पानी टंकी आदि में इसका काफी उपयोग होता है, परंतु अधिकांश कृत्रिम पॉलीमर लंबे समय तक मिट्टी एवं जल में बने रहते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि पॉलिमर व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले उन्नत पदार्थ हैं जो हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली लगभग हर वस्तु में पाए जाते हैं। आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रयोगों के कारण पॉलिमर का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार के पॉलिमर मानव जीवन को सुगम और आरामदायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जीवन, दवा, पोषण, संचार, परिवहन, सिंचाई, बर्तन, वस्त्र, इतिहास लेखन, भवन निर्माण, राजमार्ग आदि के लिए महत्वपूर्ण हैं।अतिथियों का स्वागत पुष्प- पौधों से किया गया। स्वागत संबोधन प्रो संजय कुमार चौधरी ने किया, जबकि संचालन डॉ अभिषेक राय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ सोनू राम शंकर ने किया।

