मनोरंजन

स्टूडियो में हुआ था अनोखा नजारा, मोहम्मद रफी ने किन्नरों संग गाया ऐसा गाना जो आज भी हर खुशी में बजता है

डेस्क: मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) के उन महान गायकों में गिने जाते हैं जिनकी आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसती है। उन्होंने अपने करियर में अनगिनत सुपरहिट गाने (Superhit Songs) दिए और हर तरह के गीतों को अपनी आवाज से खास बना दिया। उनकी गायकी (Singing) में ऐसा जादू था कि पुराने दौर से लेकर आज की युवा पीढ़ी तक उनके गीतों को बड़े शौक से सुनती है। लेकिन उनके करियर से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह किस्सा उस मशहूर गाने (Famous Song) से जुड़ा है जिसे उन्होंने असली किन्नरों के साथ रिकॉर्ड किया था और जो बाद में बेहद लोकप्रिय साबित हुआ।
यह गाना था “सज रही गली मेरी मां”, जिसे फिल्म ‘कुंवारा बाप’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था। इस गीत को मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी, जबकि इसका संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। खास बात यह थी कि इसी फिल्म के जरिए राजेश रोशन ने संगीत की दुनिया में कदम रखा था। गाना फिल्म में बेहद अलग अंदाज में फिल्माया गया था और इसकी रिकॉर्डिंग भी उतनी ही अनोखी रही थी।
बताया जाता है कि फिल्म के अभिनेता और निर्देशक महमूद चाहते थे कि यह गाना पूरी तरह वास्तविक लगे। इसी सोच के साथ उन्होंने कुछ असली किन्नरों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बुलाया ताकि गाने में असली माहौल और भावनाएं दिखाई दें। जब अचानक स्टूडियो में किन्नरों की एंट्री हुई तो मोहम्मद रफी कुछ पल के लिए हैरान रह गए। अपने शांत और शर्मीले स्वभाव के कारण वह शुरुआत में थोड़ा संकोच महसूस कर रहे थे। महमूद रफी साहब के स्वभाव को अच्छी तरह जानते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें समझाया और माहौल को सहज बनाया।
इसके बाद जब रिकॉर्डिंग शुरू हुई तो स्टूडियो का माहौल पूरी तरह बदल गया। मोहम्मद रफी ने पूरे दिल से गाना गाया और किन्नरों ने भी उसमें अपनी आवाज और ऊर्जा जोड़ी। रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद वहां मौजूद सभी लोग तालियां बजाने लगे। हर किसी को एहसास हो गया था कि एक बेहद खास गीत तैयार हुआ है। बाद में जब यह गाना रिलीज हुआ तो लोगों ने इसे हाथोंहाथ लिया और यह गीत खुशी और उत्सव के मौकों का अहम हिस्सा बन गया।
फिल्म ‘कुंवारा बाप’ सिर्फ कॉमेडी फिल्म नहीं थी, बल्कि इसमें भावनाओं की भी गहरी झलक देखने को मिली थी। महमूद ने इस फिल्म में एक ऐसे पिता का किरदार निभाया था जो अपने पोलियो से पीड़ित बेटे के लिए हर संघर्ष करता है। फिल्म के कई दृश्य इतने भावुक थे कि दर्शकों की आंखें नम हो जाती थीं। खास तौर पर वह दृश्य, जिसमें पिता अपने बेटे को खेल प्रतियोगिता में जीत दिलाने के लिए खुद दौड़ पड़ता है, आज भी लोगों को भावुक कर देता है।

महमूद सिर्फ शानदार कॉमेडियन ही नहीं बल्कि बेहतरीन निर्देशक भी थे। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में बनाई जिनमें मनोरंजन के साथ गहरी भावनाएं भी दिखाई देती थीं। वहीं मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से हिंदी सिनेमा को कई अमर गीत दिए। उनके गाए गाने आज भी हर पीढ़ी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं जितने अपने दौर में हुआ करते थे। उनकी गायकी का असर ऐसा था कि उनके निधन के वर्षों बाद भी लोग उन्हें उसी सम्मान और प्यार के साथ याद करते हैं।

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