डेस्क: अमेरिका (US) में एक अनोखा लेकिन गंभीर मामला सामने आया, जब एक ह्यूमनॉइड रोबोट की वजह से फ्लाइट को देरी का सामना करना पड़ा। सुरक्षा जांच में रोबोट के अंदर प्रतिबंधित क्षमता वाली बैटरी मिलने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
यह मामला Southwest Airlines की उस फ्लाइट का है, जो ओकलैंड से सैन डिएगो जा रही थी। “Bebop” नाम का करीब 32 किलो वजनी ह्यूमनॉइड रोबोट अपने टीम के साथ यात्री के रूप में सफर कर रहा था, लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान यह पूरी उड़ान के लिए चिंता का कारण बन गया।
एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों को शक हुआ कि इतने भारी और तकनीकी उपकरण वाले रोबोट को यात्री के तौर पर ले जाना सुरक्षित है या नहीं। इसी कारण उसकी गहन जांच शुरू की गई, जिससे फ्लाइट करीब एक घंटे तक रुकी रही।
जांच के दौरान असली समस्या रोबोट में लगी बैटरी को लेकर सामने आई। पता चला कि Bebop में लगी लिथियम बैटरी तय सीमा से अधिक क्षमता की थी। आमतौर पर फ्लाइट में 100Wh तक की बैटरी आसानी से ले जाई जा सकती है, जबकि 160Wh से ज्यादा क्षमता वाली बैटरियों पर सख्त प्रतिबंध होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी लिथियम बैटरियां “थर्मल रनअवे” जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं, जिसमें बैटरी अचानक गर्म होकर आग पकड़ सकती है। उड़ान के दौरान ऐसी घटना विमान और यात्रियों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, इसलिए एयरलाइंस इस मामले में सख्त नियम अपनाती हैं।
सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बैटरी की जांच, उसकी क्षमता की पुष्टि और फिजिकल इंस्पेक्शन किया गया। अंततः बैटरी को रोबोट से अलग कर जब्त कर लिया गया, जिसके बाद ही Bebop को फ्लाइट में यात्रा की अनुमति दी गई।
इस दौरान रोबोट ने यात्रियों का ध्यान बांटने के लिए छोटे-छोटे एक्ट भी किए, जिससे माहौल कुछ हल्का जरूर हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने कोई जोखिम लेने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब संबंधित कंपनी जब्त बैटरी को वापस पाने की कोशिश कर रही है। भविष्य में ऐसे उपकरणों को फ्लाइट में ले जाने के लिए बैटरी को अलग से कार्गो के जरिए भेजने की योजना बनाई जा रही है।
यह घटना बताती है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही सख्ती से सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी हो गया है-वरना एक छोटी सी लापरवाही बड़ा खतरा बन सकती है।

