डेस्क: फिल्मी दुनिया (film world) में हंसी बिखेरने वाले कलाकारों की कहानियां अक्सर संघर्ष से भरी होती हैं, लेकिन जॉनी लीवर (Johnny Lever) की कहानी उन सबमें अलग है, जहां गरीबी, मेहनत और हुनर ने मिलकर एक असाधारण सफर लिखा।
आज बॉलीवुड में कॉमेडी की बात हो और जॉनी लीवर का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। लेकिन उनकी जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन हालातों में हुई थी। एक तेलुगू परिवार में जन्मे जॉनी लीवर के पिता (Hindustan Unilever) में ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर ही रही।
बेहतर जिंदगी की तलाश में उनका परिवार मुंबई की झुग्गियों में आकर बस गया, जहां रोजमर्रा का गुजारा करना भी चुनौती था। तंगी इतनी ज्यादा थी कि जॉनी लीवर को Andhra Education Society English High School में सातवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
जीवन की गाड़ी चलाने के लिए उन्होंने मजदूरी की और मुंबई की सड़कों पर पेन बेचने लगे। लेकिन यही सड़क उनका पहला स्टेज भी बनी। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वह फिल्मी सितारों की मिमिक्री करते, गानों पर डांस करते और लोगों को हंसाते। धीरे-धीरे उनका यह हुनर लोगों का ध्यान खींचने लगा और उनकी पहचान बनने लगी।
संघर्ष के दौर में एक समय ऐसा भी आया जब महज 13 साल की उम्र में उन्होंने जिंदगी से हार मानने की कोशिश की। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। उसी संघर्ष ने उनके अंदर के कलाकार को और मजबूत बना दिया।
आगे चलकर यही लड़का बॉलीवुड का बड़ा कॉमेडियन बना और अपनी मेहनत के दम पर करीब 277 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बन गया।
जॉनी लीवर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर हुनर और हिम्मत साथ हो तो इंसान किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है।

