डेस्क: 1980 के दशक में Kishore Kumar का नाम हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में सफलता की गारंटी माना जाता था। उनकी आवाज जिस फिल्म में होती, उसके गीतों का हिट होना लगभग तय समझा जाता था। उसी दौर में एक नए अभिनेता के रूप में Govinda ने अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती फिल्मों की सफलता के बावजूद वह उस समय इतने बड़े सितारे नहीं बने थे कि बड़े गायक उनके लिए गाने गाने को तुरंत तैयार हो जाएं।
अपने करियर के शुरुआती चरण में गोविंदा ने एक कम बजट की फिल्म ‘ड्यूटी’ साइन की, जिसके निर्देशक Ravikant Nagaich थे और संगीत की जिम्मेदारी Babla Shah के पास थी। फिल्म का बजट सीमित था, इसलिए बड़े कलाकारों को लेना भी मुश्किल हो रहा था। इसी बीच गोविंदा ने एक ऐसी मांग रख दी, जिसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म के गाने अगर किशोर कुमार गाएंगे तो इससे न केवल फिल्म को फायदा होगा बल्कि उनकी पहचान भी मजबूत होगी।
यह मांग सुनकर फिल्म से जुड़े लोगों को संदेह हुआ, क्योंकि उस समय किशोर कुमार की फीस काफी अधिक थी और इतने छोटे प्रोजेक्ट के लिए उन्हें लाना लगभग असंभव माना जा रहा था। लेकिन गोविंदा अपने फैसले पर अडिग रहे। उनका मानना था कि अगर सही आवाज मिल जाए तो फिल्म का असर कई गुना बढ़ सकता है।
आखिरकार इस चुनौती को पूरा करने के लिए Kalyanji–Anandji की मदद ली गई। इस प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी का किशोर कुमार के साथ पुराना और सफल रिश्ता रहा था। जब उन्होंने किशोर कुमार से इस फिल्म के लिए गाने का अनुरोध किया, तो वे उनकी बात टाल नहीं पाए और कम फीस में गाने के लिए तैयार हो गए।
किशोर कुमार ने इस फिल्म के लिए दो गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें “जिस महफिल में आता हूं” और “तुम जिसे चाहो” जैसे गीत शामिल थे। फिल्म रिलीज होने के बाद ये गाने दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए और गोविंदा की पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी एक कलाकार का विश्वास और सही निर्णय किस तरह पूरे प्रोजेक्ट की दिशा बदल सकता है। गोविंदा की जिद और किशोर कुमार का सहयोग, दोनों ने मिलकर एक ऐसी शुरुआत दी, जिसने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को एक बड़ा स्टार और कई यादगार गाने दिए।

