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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने प्रपंच की शुरुआत करते हुए कहा- अखबारन मा छपि रही ख़बरन ते लागत हय कि महाराष्ट्र म उद्धव ठाकरे क गिने-चुने दिन बचे हयँ। भाजपा बड़ी सधी चाल चल रही। बीजेपी गालिव म हय अउ चवाट ते बहिरव हय। भाजपाई उद्धव सरकार का गिरावयम जीव-जान ते जुटियान हयँ।मुला, शिवसेना केरे विद्रोह ते अपन […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने प्रपंच की शुरुआत करते हुए कहा- देस म ‘कौव्वा कान लइगा’ वाली स्थिति बनिन रहत हय। बिन मसला समझे-बुझे, झूठ-साँच जाने बिना हिंसक प्रदर्शन होय लागत हय। हर बात म हिंसक प्रदर्शन, पथराव, आगजनी, रेल रोको शुरू होई जात हय। पहले एनआरसी अउ कृषि कानूनन क नाम प बवाल भवा। अब नूपुर […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने प्रपंच का आगाज करते हुए कहा- मुस्लिम समाज का आत्ममंथन करय क चही। सब जने का धार्मिक कट्टरता केरे फंदे ते निकरयक क चही। मुसलमानन का हिन्दू-मुस्लिम सहअस्तित्व केरे बारे म सोचय क चही। सगरा मुसलमान भारत का अपन देस मानय। हिंया केरी कार्यपालिका अउ न्यायपालिका प विश्वास करय। सभे अपने बच्चन का […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने प्रपंच का आगाज करते हुए कहा- मन्दिर-महजिद अउ हिन्दू-मुस्लिम केरे विवाद म देस कब तलक उलझा रही? या बाति बिल्कुल साँच आय कि याक जमाने मा हजारन मन्दिर तूरेगे रहयं। सब ते प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का नष्ट कीन गवा रहय। तमाम शहरन केर नाव बदलेगे रहयं। मुस्लिम लुटेरे गति-विधिके भारत का लुटिन […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने प्रपंच की शुरुआत करते हुए कहा- राजनीति म मरियादा नाय भंग होय क चही। पद केरी गरिमा बनाए राखय क चही। नेतन का असभ्य अउ असंसदीय भासा ते बचय क चही। विधायक अउ साँसदन का अपन आचरण बहुतै नीक राखय क चही। काहे ते युवा पीढ़ी प नेतन केरे आचरण क्यारु प्रभाव परत […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने प्रपंच का आगाज करते हुए कहा- देस म पूजा स्थलन क्यारु विवाद बढ़तय जाय रहा। सैकड़न साल बादि अयोध्या विवाद निबटा। अब काशी अउ मथुरा जोर पकर लिहिस। यहिके साथे ताजमहलव क विवाद गहराय लाग हय। युहु विवाद उत्तर परदेस तलक सीमित नाय हय। मध्य परदेस, गुजरात लगायक अन्य राज्यन म विवाद […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने प्रपंच का आगाज करते हुए कहा- या गरमी मडारि भइय्या। काल्हि दिन मा चारि दांय नहावा। रात म तीन दफा चद्दर गील कइके ओढ़ेन। तब जाइके नींद परी। आजु सबेरे ते फूंके हय। इ साइत पंखा आगि उगल रहे। बसि कूलर अउ एसी म आराम मिलत हय। मुला, हम पंच कूलर अउ एसी […]

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कविता : जननी तुझे सम्पूर्ण समर्पण (प्रो. आशीष दीक्षित)

जननी तुझे सम्पूर्ण समर्पण ओ जननी करो कुछ ऐसा, कि न हो अनुभव मुझे तुम्हारा अभाव, रहे हरदम यही भाव, कि तुम प्रतिपल मेरे पास। मेरी प्रत्येक श्वास, बन जाए तुम्हारी आराधना, और प्रत्येक निश्वास, हो जाए तुम्हारी प्रार्थना। ओ जननी मैं जानता हूँ, कि तुमको मुझसे स्नेह है, फिर इस दूरी के पीछे क्या […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने प्रपंच का आगाज करते हुए कहा- योगी महाराज अपन राजकाज नीके चलाय रहे। परदेस क्यारु विकास होय रहा। जनता का लोक कल्याणकारी योजनन क्यार लाभु मिलि रहा। अपराध अउ भ्र्ष्टाचार पय लगाम लाग हय। गौ वंश का बूचड़खाना जाय ते रोकिन हय। मुख्यमंत्री बड़े नीक-नीक कामु किहिन हय। मुदा, छुट्टा जानवरन ते […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने प्रपंच की शुरुआत करते हुए कहा- यहि तिना जौ गरमी बढ़त रही, तौ याकव चिरई-चिंगुन न बचिहैँ। सब पट-पटाय जइहैं। मनई तौ पंखा, कूलर अउ एसी म जान बचाय हय। मुला, पशु-पक्षिन केरी दशा बहुतै खराब हय। सारा दिन आसमान ते आगि बरसत हय। तालाबन केरी संख्या अंगुरी प गिनय भरिकी बची हय। […]