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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से   नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) चतुरी चाचा आज बड़ी प्रसन्न मुद्रा में बैठे थे। उनके आजु-बाजू ककुवा व बड़के दद्दा विराजमान थे। वहीं, कासिम चचा व मुंशीजी तपता ताप रहे थे। क्योंकि, हल्की धूप खिल जाने के बाद भी ठंडक थी। हमेशा की तरह हाथ धोने […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) मैं आज प्रपंच चबूतरे पर जब पहुंचा तो चतुरी चाचा, कासिम चचा एवं मुंशीजी विराजमान हो चुके थे। तीनों लोग अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव और बिहार के विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा कर रहे थे। चतुरी चाचा ने अमेरिका में जो बाइडेन […]

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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से   नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार (यूपी) चतुरी चाचा आज प्रपंच चबूतरे पर बड़ी प्रसन्न मुद्रा में बैठे थे। कोरोना काल में चतुरी चाचा के अपने नियम हैं। सभी परपंचियों के लिए मॉस्क लगाना ही नहीं, बल्कि एक दूसरे से दूर बैठना भी अनिवार्य है। चबूतरे पर विराजने […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से   नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)   आज मैं प्रपंच चबूतरे पर थोड़ा देर से पहुंचा। क्योंकि, कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते मेरे घर के आसपास साफ-सफाई और छिड़काव चल रहा था। मैं जब चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा के साथ ककुवा, कासिम चचा, मुंशीजी […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)   आज सुबह से रिमझिम रिमझिम पानी बरस रहा था। मैं जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो वहां सन्नाटा था। तभी चतुरी चाचा की आवाज आई। रिपोर्टर, आगे बढ़ि आव। मैंने सामने देखा तो मड़हा में चतुरी चाचा तख्त पर विराजमान थे। […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी)   आज चतुरी चाचा बहुत खुश थे। वह मुंशीजी व कासिम चचा से झलने में पड़े थे। चतुरी चाचा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 74वें स्वाधीनता दिवस पर दिए गए भाषण की तारीफ कर रहे थे। प्रपंच चबूतरे पर आज सैनिटाइजर, मॉस्क के साथ […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) आज जब मैं प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा के साथ ककुवा व बड़के दद्दा राम मंदिर पर चर्चा कर रहे थे। वहीं, पच्छेहार से आए मुंशीजी व कासिम चचा हाथ-पैर धो रहे थे। सबके चेहरे पर मॉस्क लगे थे। ककुवा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)  आज चतुरी चाचा ने अपने मड़हा में प्रपंच के लिए दो तख्त और कुछ कुर्सियां डलवाई थीं। क्योंकि, भोर से ही सावन की रिमझिम हो रही थी। ऐसे में खुले प्रपंच चबूतरे पर पंचायत नहीं हो सकती थी। मैं जब वहां पहुंचा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा नदियारा भउजी से बतियाने में पड़े थे। नदियारा भउजी कनवा घूंघट काढ़े पुरबय टोला का प्रपंच कर रही थीं। दरअसल, चतुरी चाचा का घर गांव के बाहर है। उनका प्रपंच चबूतरा गांव […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) आज जब मैं प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा अपनी महफ़िल जमा चुके थे। चतुरी चाचा, मुंशीजी, कासिम चचा व बड़के दद्दा मुँह पर मॉस्क लगाए थे। वहीं, ककुवा गमछे से मुंह बांधे हुए थे। सब चबूतरे के चारों तरफ पड़ी […]