दरभंगा बिहार मुजफ्फरपुर साहित्य स्थानीय

कहानी : ” प्यार लक्स और चूहे का”

” प्यार लक्स और चूहे का “                               (अमृता)   मैं महज दस या ग्यारह साल की थी, सिनेमा का कुछ यूं खुमार चढ़ा की खुद को हिरोइन जैसी बनाने को मचल उठी। उस वक्त सारी खूबसूरत हिरोइनें लक्स साबुन से […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) आज जब मैं प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा के साथ ककुवा व बड़के दद्दा राम मंदिर पर चर्चा कर रहे थे। वहीं, पच्छेहार से आए मुंशीजी व कासिम चचा हाथ-पैर धो रहे थे। सबके चेहरे पर मॉस्क लगे थे। ककुवा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)  आज चतुरी चाचा ने अपने मड़हा में प्रपंच के लिए दो तख्त और कुछ कुर्सियां डलवाई थीं। क्योंकि, भोर से ही सावन की रिमझिम हो रही थी। ऐसे में खुले प्रपंच चबूतरे पर पंचायत नहीं हो सकती थी। मैं जब वहां पहुंचा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा नदियारा भउजी से बतियाने में पड़े थे। नदियारा भउजी कनवा घूंघट काढ़े पुरबय टोला का प्रपंच कर रही थीं। दरअसल, चतुरी चाचा का घर गांव के बाहर है। उनका प्रपंच चबूतरा गांव […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी) आज जब मैं प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा अपनी महफ़िल जमा चुके थे। चतुरी चाचा, मुंशीजी, कासिम चचा व बड़के दद्दा मुँह पर मॉस्क लगाए थे। वहीं, ककुवा गमछे से मुंह बांधे हुए थे। सब चबूतरे के चारों तरफ पड़ी […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी)   आज प्रपंच चबूतरे पर बीचोबीच में चतुरी चाचा विराजे थे। सामने थोड़ी-थोड़ी दूर पर कुर्सियां पड़ी थीं। चबूतरे के एक कोने पर बाल्टी में पानी, लोटा और साबुन रखा था। चतुरी चाचा के पास कुछ मॉस्क और सैनिटाइजर की शीशी भी […]

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साथी खास कविता प्रतियोगिता से:-

बचपन की यादें वो बचपन की यादें भी कितनी हसीन थीं न कुछ पाने की चिंता .. न खोने का डर…. वो कागज की नाव वो पेड़ों के झूले… वो मिट्टी का घरौंदा और रेत के टिले.. वो माँ की मार और पापा का प्यार… वो मेरा रूठना… और माँ का मनाना… वो बचपन का […]

उत्तर प्रदेश दरभंगा प्रादेशिक बिहार मनोरंजन मुजफ्फरपुर साहित्य सोशल मीडिया स्थानीय

साथी कविता प्रतियोगिता से

गरीब की भूख गरीब की भूख क्या क्या नहीं उससे करवाती है, जिंदगी के सारे रंग उसके सामने लाती है। भूख से तड़पे और रोटी को तरसे, ना खाने को रोटी न पीने को पानी। वो हर पल मेहनत करता है .. भूख मिटाने की अपना पेट भरने की और परिवार चलाने की.. पेट के […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान (वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार,यूपी) मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो चतुरी चाचा, ककुवा व बड़के दद्दा खादी-खाकी-अपराधी गठजोड़ पर चर्चा कर रहे थे। तीनों लोग कानपुर की घटना के परिपेक्ष्य में गम्भीर बातें कर रहे थे। तभी दक्खिनय-हार से नदियारा भौजी आ गईं। नदियारा भौजी […]

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‘साथी’ कवि सम्मेलन की खास रचना : छोटे-से प्रयास में छिपा है समस्या का परिहार (आशीष दीक्षित)

छोटे से प्रयास में छिपा है समस्या का परिहार   प्रश्न पूछा है बहन ने नितांत मौलिक, पर उत्तर इसका नहीं है कोई अलौकिक, अगर आप केवल देखें अपना परिवेश, तो ही उत्तर मिल जायेगा, थोड़ा समय दें जीवन को, फिर सब समझ आएगा. दरसअल जीवन एक आवश्यकता है, इससे घृणा या दूरी का तो […]