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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने चुनावी बेला में हो रहे दल-बदल और गठबंधन की चर्चा करते हुए कहा- परदेस अउ देस म बेजमीर वाले नेतन कय जमात बढ़त जाय रही। ई प्रकार के नेतन केरी न अपन कौनिव सोच हय। न इनका कौनिव विचारधारा म विश्वासु हय। एन्हिन पय “जहां मिलय सुरवा, हुवाँ बैठय उटकुरुवा” कहावत बनी हय। […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक की चर्चा करते हुए कहा- हम याक बड़ी करू बाति कहय जाय रहेन। कांग्रेस मोदी क विरोध करत-करत देस केरी सुरक्षा ते खेलिय लागि हय। कांग्रेस का या बाति समझय क चही। प्रधानमंत्री कौनव दल का नाय होत हय। पीएम तौ सगरे देस क होत हय। […]

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कविता : प्रेम और बंधन (आशीष दीक्षित)

प्रिय आत्मन ! दो ही मार्ग हैं तुम्हारे लिये यदि हो प्रेम में, तो अस्तित्व में पाओगी अभिनंदन या तो प्रेम या फिर बन्धन और अगर पाओ घृणा, अपमान व प्रवंचना तो समझ लेना की पड़ गया गले एक बन्धन प्रेम एक स्वतंत्रता है जिसमें यदि हो तुम जीवन-रथ का संचालन तो अस्तित्व ही करेगा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने कोरोना महामारी के विकराल रूप की चर्चा करते हुए कहा- अब तौ यहै लागत हय कि इ महाब्याद्धि केरे साथे जियय क परी। बताव तीसर साल लागि गवा। कोरउना ते मुक्ति नाय मिलि रही। दुनिया भर मा तबाही मचि हय। बड़े-बड़े देसन कय हालत पतली होय गयी। कुछु महीना नीके बीतत हयँ। फिरि […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

प्रपंच का आगाज करते हुए चतुरी चाचा ने कहा- कोरउना न भवा, सार शोले फिलम केरा गब्बर डाकू होय गवा। गब्बर तिना कोरउना होरी म आवत हय। पीछे दुई होरी नासि कय डारिस। यहू साल फागुन म कोरउना क तिसरी लहर आवय वाली हय। पहिले खाली कोरउना फिरि डेल्टा अब ओमिक्रोन अउ डाल्मिक्रोन कोरउना आय […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

नेताओं की बदजुबानी की चर्चा करते हुए ककुवा ने कहा- नेतन केरी बदजुबानी बढ़तय जाय रही। कयू नेता मीडिया म बने रहय ख़ातिन अटाय-सटाय बक्का करत हयँ। लोग-बाग उनकी बातन का चटखारा लैके पढ़त-सुनत हयँ। यहिते उई मनबढ़ होत चले जाय रहे। अब द्याखव शुक का करनाटक म कांग्रेसी विधायक रमेश केतना गन्दा बोलिस। अइसी […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने खेती-किसानी की चर्चा करते हुए कहा- वयसी सरकार विधानसभा चुनाव क फेर मा उलझी हय। अइसी किसानन कय तकलीफ बढ़त जाय रही। रबी फसल कय बुवाई क्यारु सीजन हय। डीजल केर भाव रोज बढ़तै जाय रहा। बिजलिव बिल्लवाय हय। नहरन मा पानी अबहीं छोंड़ा नाय गवा। धान, उरद, जोनधरी अउ तिल्ली सब काटि-माड़िय […]

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कविता : संसार का विस्तार…(आशीष दीक्षित)

संसार का विस्तार इन नेत्रों में समाए ओ प्रिय यह पग गति का निरंतर ही प्रेम पाये तुम्हारा ही विस्तार है इस अचल नीलाकाश में बसे हो तुम बनकर सुधा मेरी प्रत्येक श्वांस में तुम मृत्यु से पर्यन्त हो तुम परम जीवन्त हो हृदय उमगते प्रेम को अब कहो कैसे छिपाएं संसार का विस्तार——— मेरा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा ने कोरोना की तीसरी लहर की चर्चा करते हुए कहा- कुछु दिन सुकून रहा। अब फिरि कोरोना भेष बदलि क आय गवा। पता नाइ रामजी का करइयां हयँ। दुई साल ते सगरा संसार कोरउना झेलि रहा हय। केतना मनई बैमौत मरि गवा। बेकारी अउ महंगाई अलग ते बढ़ि रही। अबसिला ओमिक्रोन नाव केरा […]

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हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ककुवा ने मुंडन-शादी दावतों में भोजन बर्बाद होने की चर्चा करते हुए कहा- भइया, एकु हमार जमाना रहय। तब सगरे नेवताहरी पत्तल सफाचट कयके उठत रहयं। एकु तुमार जमाना आवा हय। अब प्लेटन म खाना छोड़ब बड़ मनई कय निशानी समझी जात हय। हे भगवान! केतना भोजन बर्बाद कीन जाय रहा हय। हमार जइस कुछु […]