साहित्य

कविता : ये ओहदेदार… (नागेंद्र सिंह चौहान)

ये ओहदेदार •••••••••••••••••• ये जो कुछ ओहदेदार हैं न हमको आदि इत्यादि समझने लगे हैं। जाने कैसे भूल गए ये लोग कल आदि थे कल फिर इत्यादि होंगे। नशा कुर्सी में है शायद देखो, वो एकदम मदांध हो गए हैं। नदारत होंगे उनके सारे चिंटू एक दिन जब ओहदेदार ही न रहेंगे। हम कोई गर्म […]

साहित्य

कविता : आज यूं ही मन उदास है… (संध्या सिंह)

आज यूँ ही मन उदास है हालांकि सारे अपने भी पास हैं रात थोड़ा और गहराई हर तरफ खामोशी सी छाई नींद ने फिर हमसे किनारा कर लिया आँख बंद कर ख्याल तुम्हारा कर लिया साँसों की लय थोड़ा धीमी है मुस्कान भी आज कुछ भीनी है आखों का दर्द छलक के बह गया फिर […]