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आसाराम आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, 4 मई तक यथास्थिति का आदेश

डेस्क: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अहमदाबाद (Ahmedabad) में स्थित आसाराम (Asaram) के आश्रम को बड़ी राहत देते हुए विवादित जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने आदेश दिया है कि 4 मई तक जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाए।
यह मामला 45 हजार वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है, जिसे गुजरात सरकार 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के उद्देश्य से वापस लेना चाहती है। वहीं आश्रम ट्रस्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अतिक्रमण और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था।
अदालत ने मांगे दस्तावेज
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि विवादित जमीन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएं। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर यह पाया कि ट्रस्ट को उचित नोटिस दिए जाने पर सवाल उठते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन दिन के भीतर सभी दस्तावेज दाखिल करने को कहा है, जबकि ट्रस्ट को भी अपना पक्ष रखने के लिए समान समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।

नोटिस पर विवाद
सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रस्ट को उचित नोटिस नहीं दिया गया। हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने दावा किया कि सभी आवश्यक नोटिस जारी किए गए थे और पट्टे की शर्तों का कई बार उल्लंघन हुआ है।
जमीन आवंटन और विवाद
सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि जमीन पर बिना अनुमति के 30 से अधिक निर्माण किए गए हैं। वहीं अदालत में टिप्पणी करते हुए जस्टिस नाथ ने सवाल किया कि पहले उदारता दिखाते हुए जमीन दी गई, लेकिन अब अचानक पट्टा समाप्त करने की मांग क्यों की जा रही है।
ट्रस्ट का पक्ष
आसाराम ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि यह जमीन सामाजिक कार्यों और एक स्कूल के संचालन के लिए दी गई थी। उन्होंने कहा कि 1960 में चैरिटेबल ट्रस्ट को लगभग 6,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि आवंटित की गई थी और पट्टे की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है।
कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई पूरी होने तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी और संपत्ति पर यथास्थिति बनी रहेगी। सरकार की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि अगली सुनवाई तक कोई निर्माण या ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट पहले ही ट्रस्ट की अपील खारिज कर चुका था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

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