दरभंगा

विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग द्वारा संचालित ‘पत्रकारिता एवं जनसंचार कोर्स’ का 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर उद्घाटित

दरभंगा:पत्रकारिता का क्षेत्र काफी विस्तृत एवं महत्वपूर्ण, जिसमें नैतिकता की काफी महत्ता- प्रो उमेश कुमार

*पत्रकारिता समाज का आईना जो जनता और सरकार के बीच एक महत्त्वपूर्ण सेतु सदृश- डॉ चौरसिया

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग द्वारा संचालित “पत्रकारिता एवं जनसंचार कोर्स” के 2025-26 सत्र के छात्र-छात्राओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन सिटीजन आवाज कार्यालय, लहेरियासराय में किया गया। विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो उमेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के पीआरओ एवं सीएम कॉलेज में पत्रकारिता कोर्स के पूर्व समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया, मुख्य प्रशिक्षक पंकज कुमार झा, ललन कुमार झा एवं प्रशिक्षक आशीष रंजन, धनराज कुमार, सियाराम मुखिया, प्रणव कुमार मिश्रा, विक्रम कुमार, धनंजय कुमार, अंकित कुमार, नीरज कुमार, अक्षय कुमार झा, सिकंदर कुमार महतो, धीरज कुमार, गुड्डू कुमार आदि उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत पौर्ट-पौधों से किया गया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो उमेश कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र काफी विस्तृत एवं महत्वपूर्ण है। इसमें नैतिकता की काफी महत्ता होती है। पत्रकारों को हमेशा प्रेस मैन्युअल का पालन करना चाहिए। पत्रकार हमें सिर्फ वस्तु स्थिति से अवगत ही नहीं करते, बल्कि समाज की सर्वोत्तम सेवा भी करते हैं। अखबारों की छोटी खबर भी काफी प्रभावी सिद्ध होती है। कहा कि पत्रकारिता हमें दिशा प्रदान कर दायित्वों का बोध भी करता है। यह समाजसेवा के साथ ही प्रतिष्ठित पेशा भी है। उन्होंने कई सफल पत्रकारों की प्रेरक रिपोर्टिंग की चर्चा करते हुए प्रशिक्षु छात्रों को भी सफल पत्रकार बनने के कई गुरुमंत्र सिखाएं।
मुख्य अतिथि डॉ आर एन चौरसिया ने पत्रकारिता को समाज का आईना बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है जो जनता और सरकार के बीच सेतु सदृश काम करती है। यह एक बड़ा मध्यम है जो लोगों को सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और जागरूकता प्रदान करता है। यह जनता की संसद है, जिसमें हमेशा जनता की बातें प्रमुखता से उठायी जाती हैं। कहा कि पत्रकारिता पांचवें वेद के समान है, जिससे हम ज्ञान-विज्ञान संबंधी अनेक बातों को जानकर लाभ उठा पाते हैं। पत्रकारिता एक कला है जो तेजी से लोकमत बनाने या समाज-परिवर्तन की क्षमता रखती है। यह दावे-कुचले एवं हांसिये के लोगों की मुखर आवाज है। डॉ चौरसिया ने कहा कि पत्रकारिता जनसंचार का सशक्त माध्यम है जो सिर्फ आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि आम लोगों में आत्मविश्वास का भाव जागने का बेहतरीन मध्यम भी है।
आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य प्रशिक्षक पंकज कुमार झा ने बताया कि इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में छात्रों को पत्रकारिता मैन्युअल की विस्तृत जानकारी के साथ ही वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, शीर्षक लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग, साक्षात्कार तथा किसी भी सामयिक समस्या पर लिखने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आशीष रंजन के संचालन में आयोजित उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन ललन कुमार झा ने किया। इस अवसर पर कई छात्रों ने साक्षात्कार लेना, ग्राउंड रिपोर्टिंग करना तथा समकालीन समस्याओं पर लेखन कला आदि की बेहतरीन प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कई छात्रों ने पत्रकारिता एवं अन्य समस्याओं से संबंधित रोचक प्रश्नों को रखा, जिनका समुचित उत्तर अतिथियों ने दिया।

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