डेस्क: एक साधारण मोमोज और फास्टफूड का ठेला चलाने वाला युवक धीरे-धीरे ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) के बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गया और देखते ही देखते करोड़ों की अवैध कमाई कर बैठा। पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर को गिरफ्तार किया है, जो सोशल मीडिया (Social Media) के जरिए युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी (Online Gaming and Betting) के जाल में फंसाता था।
आरोपी की पहचान शिवा कुशवाहा के रूप में हुई है, जो अपने भाई के साथ फास्टफूड का ठेला लगाता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह Big Daddy App नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ था और एजेंट के तौर पर काम करता था।
एसपी ग्रामीण श्रीशचंद्र के मुताबिक, हरियाणा के रोहतक से मिली शिकायत के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहकर फर्जी वीडियो, जीत के स्क्रीनशॉट और झूठे दावों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करता था।
वह खुद को सफल ऑनलाइन गेमर बताकर यह दावा करता था कि उसने इस ऐप से लाखों रुपये कमाए हैं। उसके झांसे में आकर कई युवाओं ने अपनी मेहनत की कमाई इस प्लेटफॉर्म पर लगा दी, लेकिन बाद में अधिकांश लोग नुकसान में चले गए। शुरुआती छोटे मुनाफे दिखाकर लोगों का भरोसा बनाया जाता था, जिसके बाद उनसे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को हर नए यूजर को जोड़ने और निवेश करवाने पर कमीशन मिलता था। इसी कमीशन के जरिए उसने कुछ ही वर्षों में भारी संपत्ति बना ली।
मामले में इंस्पेक्टर संजय सिंह की तहरीर पर 13 मार्च को आरोपी समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गुरुवार को पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि वह टेलीग्राम के जरिए एक नेटवर्क से जुड़ा था, जो इस ऐप का संचालन करता है।
लग्जरी जिंदगी पर खर्च की ठगी की कमाई
जांच में पता चला कि आरोपी ने करीब एक करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। इस पैसे से उसने अपने भाई के नाम पर लगभग 22 लाख रुपये की कार खरीदी, 50 लाख रुपये में आलीशान मकान बनवाया और करीब 22 लाख रुपये की लग्जरी बाइक भी ली। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस साइबर ठगी का असली संचालन कहां से हो रहा था और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हैं।

