राष्ट्रीय

‘वैदिक स्कूल या यातना गृह?’ 11 साल के छात्र की मौत ने खड़े किए सवाल, शरीर पर 45 चोटों के निशान

डेस्क: उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur UP) से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 11 वर्षीय छात्र दिव्यांश की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिवार ने इसे सीधा हत्या (Murder) का मामला बताते हुए स्कूल प्रबंधन (school management) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

7 दिन पहले छोड़ा था स्कूल, अब मिला शव

परिजनों के मुताबिक, दिव्यांश को महज एक सप्ताह पहले लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में पढ़ाई के लिए छोड़ा गया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्कूल संचालक बच्चे का शव कार से उसके घर लेकर पहुंचा, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

शरीर पर 40-45 चोटों के निशान

परिवार का आरोप है कि बच्चे के हाथ-पैर बांधे गए थे और बेरहमी से पिटाई की गई।
शरीर पर 40 से 45 चोटों के निशान मिले
सिगरेट से दागने के भी आरोप
गंभीर शारीरिक यातना की आशंका
इन हालातों ने “वैदिक शिक्षा” के नाम पर चल रहे संस्थान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हत्या और साक्ष्य मिटाने का केस

पिता नरेंद्र द्विवेदी की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और चालक के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

सवालों के घेरे में गुरुकुल व्यवस्था

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता भी खड़ी करती है। जिस स्थान को शिक्षा और संस्कार का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की क्रूरता ने सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच से ही स्पष्ट हो पाएगा कि दिव्यांश की मौत किन परिस्थितियों में हुई और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।

कानपुर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है—बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता मानी जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *