जिंदा हूं मैं !
बस्ती के इशहाक अली आज कफ़न ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचे और खुद को जिंदा दिखाकर अफसरों की आँखें खोलने की कोशिश की है.
इशहाक अली सरकारी अस्पताल के कर्मचारी थे. 31 दिसंबर 2019 को उनका रिटायरमेंट हुआ लेकिन इससे ठीक 7 साल पहले राजस्व अभिलेखों में वह मर गए.
लेखपाल ने उनकी पैतृक जमीन उन्हें मृत बताकर एक महिला के नाम दाखिल खारिज कर दी.
इशहाक 7 वर्षों से खुद को जिंदा साबित करने में लगे हुए हैं.

