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राज्यसभा में मजबूत होती दिख रही NDA, भाजपा के संख्याबल में बढ़ोतरी के आसार; बहुमत का गणित समझिए

डेस्क: संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) से पहले राज्यसभा (Rajya Sabha) का राजनीतिक समीकरण बदलता नजर आ रहा है। हाल के घटनाक्रमों के बाद केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति पहले से मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई सांसदों के इस्तीफों और भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं ने उच्च सदन के अंकगणित को नई दिशा दे दी है।
बताया जा रहा है कि टीएमसी छोड़ने वाले तीन पूर्व सांसदों को भाजपा ने 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। यदि वे निर्वाचित होते हैं, तो राज्यसभा में भाजपा का संख्याबल और बढ़ जाएगा।

टीएमसी के कई सांसद दे चुके हैं इस्तीफा
हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं ने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है। इनमें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक) के नाम शामिल हैं। रुक्मिणी मलिक ने भी हाल ही में अपना इस्तीफा सौंपा, जिसके बाद उनके भाजपा नेताओं से मिलने की खबरों ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया।
भाजपा का आंकड़ा बढ़ने की संभावना
उपचुनाव के बाद राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 117 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सीटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा बहुमत के आंकड़े से केवल छह सीट पीछे रह सकती है।
यदि मनोनीत सदस्यों और कुछ निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी  सरकार के साथ रहता है, तो यह संख्या 127 तक पहुंच सकती है, जो साधारण बहुमत से अधिक होगी।
NDA की ताकत भी बढ़ सकती है
भाजपा के अलावा एनडीए में शामिल दलों—जदयू, टीडीपी, एआईएडीएमके, एनसीपी, शिवसेना, यूपीपीएल, आरपीआई (ए), एजीपी, एमएनएफ, एनपीपी, आरएलएम और जनसेना पार्टी—के सांसदों को जोड़ने पर गठबंधन का कुल आंकड़ा 153 तक पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि, राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटों की जरूरत होती है। इस लिहाज से एनडीए अभी भी इस आंकड़े से 11 सीट पीछे रहेगा।
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार की कोशिश है कि राज्यसभा में उसकी स्थिति इतनी मजबूत हो कि महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य संसदीय कार्यों के दौरान विपक्ष उस पर भारी न पड़ सके। आगामी दिनों में यदि उच्च सदन के राजनीतिक समीकरण में और बदलाव होते हैं, तो एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि वे बदलते राजनीतिक हालात के बीच राज्यसभा में अपनी प्रभावी मौजूदगी कैसे बनाए रखें।

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