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दरभंगा : विश्वविद्यालय इतिहास विभाग ने अपने पूर्व अध्यक्ष प्रो. मो. नैयर आजम को दी भावभीनी विदाई, किया गया सम्मान

प्रो. नैयर आजम ने हमेशा समय के पाबंद एवं जिम्मेदार शिक्षक के रूप में कार्य किया- विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय इतिहास विभाग द्वारा अपने पूर्व अध्यक्ष एवं प्राध्यापक प्रो मो नैयर आजम के गत 31 मार्च को अवकाश ग्रहण करने पर विभाग में कार्यक्रम आयोजित कर उनकी भावभीनी विदाई देने हुए उन्हें सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो. शाहिद हसन- मुख्य अतिथि, संस्कृत विभाग के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. आरएन चौरसिया- सम्मानित अतिथि, पीजी एथलेटिक्स के अध्यक्ष डॉ. प्रियंका राय एवं संस्कृत- प्राध्यापिका डॉ. ममता स्नेही- विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा विभागीय प्राध्यापक डॉ. आमिर अली खान, डॉ. अमिताभ कुमार, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. ज्योति प्रभा, मारवाड़ी कॉलेज के डॉ. फारूक आजम, सहायक मुकेश कुमार, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की ओर से अंशु अग्रवाल, सोनी कुमारी, रंजीत कुमार, प्रत्युष आदि ने विचार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में प्रो. मो. नैयर आजम को विभाग की ओर से अध्यक्ष ने पाग, चादर, बुके, मोमेंटो, बैग एवं कपड़े आदि प्रदान कर सम्मानित किया। डॉ प्रियंका राय एवं डॉ ममता स्नेही द्वारा भी कई गिफ्ट प्रदान किए गए। वहीं छात्रों एवं शोधार्थियों की ओर से भी प्रो नैयर का उपहारों द्वारा सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि छात्रा ने स्वागत गान प्रस्तुत किया।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि प्रो. नैयर के साथ मुझे काम करने का सौभाग्य मिला। ये सदा समय पाबंद एवं जिम्मेवार शिक्षक के रूप में कार्य किया है। व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, कार्य एवं गुणों से होता है, जिसे इन्होंने सिद्ध किया। कहा कि यह विभाग के अमूल्य रत्न हैं। ज्ञान, अनुभव एवं व्यावहारिकता उम्र के साथ बढ़ती है। उन्होंने प्रो नैयर से आग्रह किया कि उन्हें जब भी समय मिले आगे भी विभाग के छात्रों का मार्गदर्शन करते रहें।

मुख्य अतिथि प्रो. शाहिद हसन ने कहा कि शिक्षक कभी अवकाश ग्रहण नहीं करता है। वह हमेशा लोगों को नेकी, सच्चाई एवं सही रास्ते पर चलने का सुझाव देता है। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी की कार्य शैली की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की सदा कोशिश रहती है कि अवकाश ग्रहण के दिन ही शिक्षकों एवं कर्मियों को सभी जरूरी पेपर्स एवं सुविधाएं दे दी जाए। अवकाश ग्रहण किये प्रो नैयर आज़म ने कहा कि मैं बिल्कुल ही सामान्य व्यक्ति हूं। यदि मुझसे कोई गलती हुई हो तो उसे भूल जाएंगे। उन्होंने छात्रों से नियमित रूप से कम से कम 6 घंटे पढ़ाई करने पर जोर देते हुए कहा कि यदि वे इमानदारी पूर्वक मेहनत करते रहेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी, क्योंकि सही मेहनत कभी बेकार नहीं जाता।

पीआरओ डॉ. आरएन चौरसिया ने प्रो. नैयर के स्वस्थ, प्रसन्न एवं दीर्घ जीवन की कामना करते हुए कहा कि अब ये स्वतंत्र होकर अपने परिवार एवं समाज के लिए पूरा समय देते हुए मनचाहे कार्यों को पूरा कर सकेंगे। कहा कि इन्होंने एक शिक्षक, एनएसएस पदाधिकारी तथा विभागाध्यक्ष का दायित्व बेहतरीन ढंग से निभाते हुए छात्र-छात्राओं को ही मूल पूंजी मानकर उनकी सफलता को अपनी सर्वोच्च उपलब्धि माना।

डॉ. प्रियंका राय ने कहा कि ये छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मियों के काफी प्रिय और अच्छे एवं नेक दिल इंसान हैं। हमारी तीन पाठशालाएं- परिवार, कार्य- संस्थान एवं समाज होते हैं। इनमें से दो का इन्होंने बखूबी निर्वाह किया है। मुझे विश्वास है कि ये अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी बेहतरीन ढंग से करेंगे। डॉ. ममता स्नेही ने कहा कि ये सहज, सरल, सकारात्मक, प्रसन्नचित और इगोलेस व्यक्ति हैं। ये दूसरों की तकलीफों को अच्छे से महसूस कर उन्हें दूर करने का प्रयास भी करते हैं। डॉ. आमिर अली खान ने इनके साथ बिताए क्षणों को संस्मरणों के रूप में सुनते हुए कहा कि ये काफी शालीन, विनम्र एवं प्रभावशील व्यक्ति हैं। ये शालीनता के प्रतिमूर्ति भी हैं, वहीं दृढ़ता के मिशाल भी।

अतिथि स्वागत करते हुए डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि इन्होंने विभागाध्यक्ष की तरह नहीं, बल्कि सदा सामान्य शिक्षक की तरह व्यवहार किया। इनका कार्यकाल स्वर्णिम रहा है। ये स्वयं हमेशा विभाग बंद कराकर 5 बजे के बाद ही घर जाते थे। संचालन करते हुए डॉ अमिताभ कुमार ने कहा कि प्रो नैयर संघर्ष करते हुए जीवन में उच्चता को प्राप्त किया। इन्होंने उतार-चढ़ाव के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखा। ये सबको साथ लेकर चले। धन्यवाद ज्ञापन विभागीय प्राध्यापिका डॉ. ज्योति प्रभा ने किया।

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