डेस्क:तमिलनाडु की राजनीति में एक दशक के सबसे बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जो बिसात बिछाई है, उसने राज्य के दो पारंपरिक दिग्गजों—DMK और AIADMK—की नींद उड़ा दी है। विजय की रणनीति का केंद्र है चेन्नई, एक ऐसा शहर जिसे द्रविड़ राजनीति का ‘अभेद्य किला’ माना जाता है। विजय वह करने का साहस कर रहे हैं जो AIADMK के संस्थापक MGR या ‘अम्मा’ जयललिता ने भी अपने शुरुआती दौर में नहीं किया था। उन्होंने सीधे DMK के गढ़ चेन्नई में घुसकर चुनौती दी है। विजय ने तिरुचिरापल्ली (पूर्व) को एक ‘सुरक्षित सीट’ के तौर पर चुना है, लेकिन उनका असली संदेश पेरम्बूर सीट से चुनाव लड़कर आता है। पेरम्बूर की सीमा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के निर्वाचन क्षेत्र कोलाथुर से लगती है। यहाँ से चुनाव लड़कर विजय खुद को स्टालिन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
