डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia Conflict) में एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष में हालात अब विस्फोटक और बेकाबू हो चुके हैं। इस्राइल और अमेरिका (Israel and America) का ईरान (Iran) के साथ जारी भीषण टकराव अब अपने 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात ज्यादा खतरनाक रूप ले चुका है। मिसाइलों की बारिश और लगातार धमाकों ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। यह युद्ध अब सीमाओं को तोड़कर वैश्विक खतरा बन गया है, जहां हर पल विनाश और अनिश्चितता का साया गहराता जा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अजरबैजान (India and Azerbaijan) के बीच कूटनीतिक स्तर पर अहम बातचीत हुई है। अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बेरामोव ने भारत के राजदूत अभय कुमार से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताई। खासतौर पर ईरान में जारी हालात और उसके असर को लेकर गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान भारतीय पक्ष ने ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में अजरबैजान द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
पिछले कुछ हफ्तों में कई भारतीय नागरिक ईरान से निकलकर जमीनी रास्ते से अजरबैजान पहुंचे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब क्षेत्र में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इस बैठक में भारत और अजरबैजान के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद से आपसी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को भी अहम बताया गया। भारतीय कंपनी ONGC विदेश की अजरबैजान के तेल क्षेत्रों और पाइपलाइन प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी को द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
तेहरान में US-इस्राइली हमले में ईरान के वरिष्ठ सलाहकार कमाल खराजी घायल
ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार कमाल खराजी तेहरान में हुए अमेरिकी-इस्राइली हमले में घायल हो गए। यह जानकारी ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के हवाले से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को तेहरान के रिहायशी इलाकों पर हुए हमले में खराजी को चोटें आईं। हालांकि उनकी स्थिति कितनी गंभीर है, इस बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इस्राइली हमलों से बेहाल बेरूत: 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर
इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष ने लेबनान की राजधानी बेरूत को मानवीय संकट के केंद्र में ला खड़ा किया है। लगातार हो रहे इस्राइली हमलों और निकासी आदेशों के कारण 10 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तलाश में पलायन कर चुके हैं। दक्षिण और पूर्वी लेबनान के गांव लगभग खाली हो चुके हैं, जबकि बेरूत अब शरण लेने वाले लोगों से भरता जा रहा है। शहर के समुद्री किनारों, पार्कों और सड़कों पर अस्थायी टेंट बस गए हैं। कई परिवार दुकानों, मस्जिदों और यहां तक कि अपनी कारों में रहने को मजबूर हैं।
ईरान के हमले जारी
ईरान ने बुधवार को इस्राइल और खाड़ी देशों पर हमले जारी रखे, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए युद्ध को और तेज करने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना बंद नहीं किया, तो अमेरिका कड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। हालांकि, इससे पहले वे यह भी संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका जल्द ही युद्ध से बाहर निकल सकता है, जिससे उनके बयानों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है।
ईरान ने कतर के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। कुवैत, सऊदी अरब और जॉर्डन में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। इस्राइल में भी अलर्ट जारी किया गया, जहां तेल अवीव में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, लेबनान में इस्राइली हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई।
ईरान का दावा- अमेरिका के साथ टकराव और वार्ता दोनों संभव
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी जनता को संदेश देते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और वार्ता दोनों ही संभव हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के किसी भी आक्रमण का ईरान सामना गर्व और दृढ़ता से करेगा। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा ‘आज विश्व एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। टकराव का रास्ता अब पहले से कहीं अधिक महंगा और व्यर्थ है।’ उन्होंने कहा कि टकराव और वार्ता के बीच चयन वास्तविक और निर्णायक है, और इसका परिणाम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।
उन्होंने ईरान के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि सदियों से ईरान ने कई आक्रांताओं का सामना किया। उनका इतिहास में केवल दागी नाम रह गया, जबकि ईरान आज भी दृढ़, सम्मानित और गर्वित है। पेजेशकियन ने पिछले सप्ताह ट्रंप द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस्राइल पर आरोप लगाया कि उसने अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में धकेला। उन्होंने सवाल किया क्या यह सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रमण में इस्राइल का प्रतिनिधि बनकर शामिल हुआ, और उस शासन द्वारा प्रभावित और नियंत्रित किया गया?
