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लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी दक्षिण भारत के लिए अन्यायपूर्ण’: कांग्रेस ने केंद्र के प्रस्तावित विधेयक पर जताई कड़ी आपत्ति

डेस्क:लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि करने के केंद्र सरकार के कथित प्रस्ताव पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस कदम को “अन्यायपूर्ण” और “दक्षिण भारत के हितों के खिलाफ” बताते हुए तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की पृष्ठभूमि में लोकसभा का आकार बढ़ाने के लिए एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। रमेश के अनुसार:

सीटों का गणित: प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों में 50% की वृद्धि की जाएगी, जिसका सीधा असर प्रत्येक राज्य को आवंटित सीटों पर पड़ेगा।

क्षेत्रीय असंतुलन: कांग्रेस का तर्क है कि इससे उत्तरी राज्यों को तो भारी फायदा होगा, लेकिन दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों का संख्याबल कमजोर हो जाएगा।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया, ‘‘मोदी सरकार लोकसभा का आकार 50 प्रतिशत बढ़ाने के लिए एक विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव कर रही है। प्रत्येक राज्य को आवंटित सीट की संख्या में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह तर्क देना भ्रामक है कि कुल सीट में 50 प्रतिशत की वृद्धि न्यायसंगत है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि अनुपात फिलहाल नहीं बदल सकता है लेकिन इसके गहरे निहितार्थ हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

रमेश ने कहा, ‘‘लोकसभा में विभिन्न राज्यों के मौजूदा संख्याबल के अंतर में किसी भी तरह की वृद्धि से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 80 सीट हैं और तमिलनाडु में 39 सीट हैं। प्रस्तावित विधेयक के साथ, उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीट की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी जबकि तमिलनाडु में अधिकतम 59 सीट हो पाएंगी।

इसी तरह, केरल में लोकसभा की 20 सीट बढ़कर 30 हो जाएंगी, जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 60 सीट हो जाएंगी। कुल मिलाकर, दक्षिणी राज्यों को 66 सीट का फायदा होगा जबकि उत्तरी राज्यों को 200 सीट का फायदा होगा।’’ रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी एकतरफा कानून तैयार कर रहे हैं जिससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम के छोटे राज्यों को नुकसान होगा।

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