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ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख, तेल कब्जाने, खार्ग द्वीप पर एक्शन और यूरेनियम ऑपरेशन की दी चेतावनी

डेस्क: डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने एक बार फिर ईरान (Iran) को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि वे ईरान का तेल (Oil) अपने नियंत्रण में लेना चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर उसके प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा भी कर सकते हैं।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो, मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ ईरान का तेल लेना है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है, हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। इन बातचीतों में पाकिस्तान के जरिए संपर्क भी शामिल बताया गया है और ट्रंप के मुताबिक ये वार्ताएं सकारात्मक दिशा में बढ़ रही हैं।

इसी बीच अमेरिकी अधिकारियों ने खुलासा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान से लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम हासिल करने के लिए संभावित सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। यह मिशन बेहद जटिल और जोखिम भरा हो सकता है, जिसमें अमेरिकी सेना को कई दिनों तक ईरान के भीतर रहना पड़ सकता है।

हालांकि अभी इस ऑपरेशन को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं, लेकिन उनका झुकाव इस विकल्प की ओर है, क्योंकि इससे ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सकता है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने पाकिस्तान के झंडे वाले तेल टैंकरों की संख्या बढ़ाने पर सहमति दे दी है। अब ये संख्या बढ़कर 20 हो गई है, जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। बताया गया है कि इस व्यवस्था को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबाफ़ ने मंजूरी दी है। खार्ग द्वीप की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने पर ट्रंप ने कहा कि वहां कोई मजबूत सुरक्षा नहीं है और अमेरिका आसानी से उस पर नियंत्रण कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने संभावित सैन्य कार्रवाई को देखते हुए करीब 10,000 सैनिकों की तैनाती की तैयारी शुरू कर दी है। हजारों सैनिक पहले ही क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जबकि अतिरिक्त बलों को भी तैनात किया जा रहा है। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खार्ग द्वीप पर किसी भी तरह का हमला बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है। इससे न केवल अमेरिकी सैनिकों को नुकसान हो सकता है, बल्कि संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका भी है। साथ ही, यह कदम दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को भी प्रभावित कर सकता है।

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