ढाका, 14 मई 2026: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर चल रही संवेदनशील परिस्थितियों के बीच बांग्लादेश ने पद्मा नदी पर एक बड़े बांध परियोजना को मंजूरी देकर नया संदेश दिया है। बांग्लादेश सरकार का दावा है कि यह परियोजना फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करने और देश में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।
सरकार की आर्थिक मामलों की सर्वोच्च समिति ECNEC ने परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी है। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना पर करीब 34,497 करोड़ टका खर्च होंगे और इसका पूरा वित्तपोषण बांग्लादेश सरकार करेगी। परियोजना के 2033 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। इससे राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के कई इलाके लाभान्वित होंगे।
जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा कि यह परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के हित में है और इसके लिए भारत से चर्चा की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गंगा जल बंटवारे को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी रहेगी।
भारत ने 1975 में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण किया था ताकि गंगा के पानी को हुगली नदी की ओर मोड़कर कोलकाता बंदरगाह में जमा गाद को साफ किया जा सके। दूसरी ओर, बांग्लादेश का आरोप है कि सूखे के मौसम में पानी की कमी से वहां खेती, नदी जलस्तर और पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी का प्रवाह कम होने से समुद्री खारा पानी बांग्लादेश की नदियों में प्रवेश कर रहा है, जिससे कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि गंगा जल बंटवारा और फरक्का बैराज का मुद्दा दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद और चर्चा का विषय बना हुआ है।
आशुतोष झा

