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व्यवहार भाषा के रूप में संस्कृत का अध्ययन, अध्यापन करने की है आवश्यकता : प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, कुलपति

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दरबार हॉल में ‘सरलमानकसंस्कृतम् ‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रविवार को किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य संस्कृत भाषा को सरल, व्यवहारिक एवं जनसुलभ बनाते हुए उसके व्यापक प्रचार प्रसार की दिशा में ठोस पहल करना रहा।  कार्यशाला का उद्घाटन केएसडीएसयू के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ .विकाऊ झा ने दीप जलाकर किया। कुलपति प्रो .लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा सरल मानक संस्कृत समय की आवश्यकता है, जिससे संस्कृत भाषा केवल शास्त्रों तक सीमित न रहकर जन-जन की भाषा बन सके। उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संस्कृत के पुनरुत्थान के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। व्यवहार भाषा के रूप में संस्कृत का अध्ययन अध्यापन करते हुए दैनिक शब्दावली को सरल एवं प्रत्यक्ष विधि के माध्यम से समझने की आवश्यकता है। कोई भी नूतन‌ भाषा नियमित व्यवहार के माध्यम से ही प्राप्त होती है। उन्होंने आगामी जनगणना में भारत की जनसंख्या के दस प्रतिशत लोगों की भाषा संस्कृत हो इसके लिए हमें प्रथम अथवा द्वितीय भाषा के रूप में संस्कृत लिखवाना चाहिए। साथ ही प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय में अध्यापन के अलावा आसपास के क्षेत्र में साप्ताहिक मेलन कर गीता पाठ, स्त्रोतपाठ, संस्कृत सम्भाषण का अभ्यास कराना चाहिए। कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रशिक्षक के रूप में प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य सह अहिल्यास्थान के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. विकाऊ झा ने संस्कृत को मानक युक्त सरल करके कैसे बोध कराया जाए इनके विभिन्न उपाय बताएं।

वहीं द्वितीय सत्र में स्नातकोत्तर व्याकरण विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. सुरेश्वर झा ने अपने विद्वत्तापूर्ण व्याख्यानों के माध्यम से विषय का विस्तृत प्रतिपादन करते हुए सरल, शुद्ध एवं मानक संस्कृत प्रयोग की पद्धति, उसके व्यावहारिक उपयोग तथा शिक्षण की नवीन तकनीकों पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ-साथ इसके 31 अंगीभूत महाविद्यालय गोपालगंज, बक्सर,पूर्णिया,भागलपुर,बेगुसराय, छपरा से संस्कृत प्रचार-प्रसार एवं विस्तार कार्यक्रम मंच के संयोजक एवं सह-संयोजक प्रतिभागियों के रूप में उपस्थित हुए। प्रतिभागियों ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी करते हुए विषय से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर संवाद एवं अभ्यास सत्रों में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम संयोजक डॉ.यदुवीर स्वरूप शास्त्री एवं विश्वविद्यालय संयोजक डॉ.रामसेवक झा ने बताया प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों द्वारा परस्पर संवाद स्थापित कर संस्कृत भाषा को आधुनिक संदर्भों में सरल एवं प्रभावी बनाने, शिक्षण पद्धति को अधिक व्यवहारिक बनाने,छात्रों में संस्कृत के प्रति रुचि जागृत करने पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम में डॉ. सुधीर कुमार, डॉ.वरुण कुमार झा डॉ.संतोष तिवारी, डॉ.रामसेवक झा, वीर सनातन पूर्णेन्दु राय, डॉ.त्रिलोक झा, ओमप्रिय,डॉ.शशिकांत तिवारी, डॉ.ऋद्धिनाथ झा,डॉ.ब्रजराज कुमार द्विवेदी,डॉ.आस्तीक द्विवेदी,डॉ. अभयकांत चतुर्वेदी,अनीस कुमार शुक्ल, डॉ.अशोक कुमार, डॉ.आदित्य प्रकाश , डॉ.बद्री नारायण गौतम, डॉ.तरुण कुमार, डॉ.प्रीति पारेश्वरी महान्ति, डॉ.राजेश्वर पासवान, डॉ.मुरारी मिश्र, डॉ.संतोष मिश्र, डॉ.मनमोहन झा, डॉ.श्रीमन्नारायण , डॉ.उमेश साफी, डॉ.ललन झा सहित शोध छात्र उपस्थित थे। सभी प्रतिभागियों को कुलपति, मंचासीन अतिथियों के हाथों प्रमाण पत्र दिया गया। संचालन, डॉ.संतोष कुमार तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ.वरुण कुमार झा ने किया।

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