प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर हुआ विमर्श
कौशल विकास में दक्षता के लिए इंटर्नशिप जरूरी
दरभंगा। संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को चतुर्थ वर्षीय शास्त्रीय पाठ्यक्रम समिति की बैठक कुलपति प्रो लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में आहूत की गई । इस दौरान प्रवेश अध्यादेश एवं परीक्षा विनियमावली में आंशिक संशोधन करते हुए एक से आठ सेमेस्टर तक निर्मित पाठ्यक्रम को उनके समक्ष उपस्थापित किया गया । कुलपति प्रो० पाण्डेय ने कहा कि इंटर्नशिप के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी । इससे संस्कृत छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा तथा वे अपने ज्ञान का समाजोपयोगी प्रयोग कर व्यवहार में परिवर्तन लायेंगे । उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शास्त्री पंचम सेमेस्टर में इंटर्नशिप यानी विशेष प्रशिक्षण को काफी महत्त्व दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धान्तिक ज्ञान तक ही सीमित नही रखना है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव से भी जोड़ना है । इंटर्नशिप के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न कार्यालयों में कार्य कर अनुभव प्राप्त करने का विशेष अवसर प्राप्त होता है ।
पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो० सुरेश्वर झा ने बताया कि शास्त्री पंचम सेमेस्टर में प्रशिक्षण सम्वर्धन पाठ्यक्रम के अन्तर्गत छात्रों को अपनी कक्षा से अवर कक्षा में अध्यापन कार्य करने हेतु दो क्रेडिट निर्धारित किया गया है। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि
विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अभिलेखों का परिचय, सूची निर्माण एवं कार्यालयीय कार्यों के सम्पादन हेतु एक क्रेडिट निर्धारित किया गया है । साथ ही शिक्षकों के वर्ग कक्ष में बैठकर अध्यापन शैली को समझने की चेष्टा के लिए एक क्रेडिट निर्धारित किया गया है। कुल चार क्रेडिट छात्रों द्वारा प्राप्त करने के उपरान्त इन्हें प्रशिक्षुता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा ।
इसके अलावा शास्त्री पंचम सेमेस्टर के प्रशिक्षुता सम्वर्धन पाठ्यक्रम में पुस्तकालय, संग्रहालय, मंदिर, ज्योतिष शोध केन्द्र, फैशन डिजाईनिंग, योगा एण्ड फिटनेश, बेव डिजाईनिंग, इलैक्ट्रीशियन आदि अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं से भी प्रशिक्षण प्राप्त कर छात्र महाविद्यालय में प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं ।
पाठ्यक्रम समिति के सदस्य डॉ० रामसेवक झा ने इंटर्नशिप को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे छात्रों में शिक्षण पद्धति, कार्यालयीय कार्य, सामाजिक व्यवहार तथा टीमवर्क की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी तथा छात्र रोजगारोन्मुख शिक्षा की दिशा में अग्रसर होंगे ।
पाठ्यक्रम समिति कि बैठक में अध्यक्ष प्रो० सुरेश्वर झा, संयोजक डी०एस०डब्लू० प्रो० पुरेन्द्र वारिक, कुलसचिव डॉ० दिनेश झा के अलावा प्रो० श्रीपति त्रिपाठी, पूर्व छात्र कल्याण अध्यक्ष सह ज्योतिष संकायाध्यक्ष डॉ० शिवलोचन झा, वित्त पदाधिकारी डॉ० पवन कुमार झा, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ० दिनेश्वर यादव, डॉ० यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ० रामसेवक झा, डॉ० वरूण कुमार झा, गोपाल उपाध्याय सम्मलित थे।

