डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच खाड़ी देशों के ईरान (Iran) के खिलाफ युद्ध (US-Inran War) में शामिल होने की आशंका बढ़ती दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि तेहरान (teharaan) क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले करता है तो कई अरब देश सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी के प्रमुख देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ईरानी हमलों से नाराज हैं और धैर्य खोते दिखाई दे रहे हैं। बताया गया है कि ईरान ने पहले ही इन देशों के बंदरगाहों, ऊर्जा सुविधाओं और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है।
युद्ध में उतरने की शर्त
सूत्रों के मुताबिक खाड़ी देश तभी सीधे युद्ध में उतरेंगे जब ईरान बिजली और पानी जैसे महत्वपूर्ण ढांचों पर बड़े हमले करता है। हालांकि वे इस कदम से बचना भी चाहते हैं क्योंकि इससे ईरान की ओर से जवाबी हमले तेज हो सकते हैं।
ओमान को छोड़ अधिकांश खाड़ी देश सख्त रुख की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा कि क्षेत्रीय देश ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं जिसमें डोनाल्ड ट्रंप तेहरान से समझौता कर लें और उन्हें अकेले ईरान का सामना करना पड़े।
ड्रोन और मिसाइल हमले तेज
पिछले 24 घंटों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई ने ईरानी ड्रोन व मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। ईरान ने कहा है कि ये देश वैध लक्ष्य हैं क्योंकि अमेरिका उनके इलाकों का इस्तेमाल कर रहा है।
खार्ग द्वीप को लेकर चेतावनी
सूत्रों के अनुसार यदि अमेरिका खार्ग द्वीप पर कार्रवाई करता है तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाब दे सकता है। बताया गया कि अल धफरा एयर बेस से अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना पर भी तेहरान ने चेतावनी दी है।
गठबंधन की संभावना
विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है तो क्षेत्रीय देश ईरान के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बना सकते हैं। दुबई स्थित नीति विशेषज्ञों ने कहा कि हालात ऐसे बने तो ‘आतंकवाद विरोधी’ गठबंधन जैसा ढांचा तैयार हो सकता है।
हजारों हमलों का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर करीब 5000 मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। इन हमलों में ऊर्जा प्रतिष्ठान, अमेरिकी ठिकाने और रिहायशी इलाके निशाने पर रहे हैं। क्षेत्र में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत की खबर है।
