डेस्क:राजनीति में कोई अपना नहीं है और कोई पराया नहीं है। कोई छोटा नहीं है कोई बड़ा नहीं है। जो कल तक कमजोर थे आज ताकतवर हैं। जो खुद को कभी सरकार मानते थे, वो आज अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। तेजी से बदलते वक्त के साथ सियासत का रंग भी बदलता है। यहां किसी चीज का मोल हो या न हो रिश्तों का कोई मोल नहीं होता। कभी अपनी सरकार के खिलाफ हमलावर रहने वाले वरुण गांधी ने बीते दिनों सपरविरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। उन्हें पितृवत बताया है। सियासत में अटकलों पर ही जब इतनी संभावनाएं जताई जाने लगती हैं। ऐसे में अचानक से हुई इस मुलाकात के मायने निकाला जाना भी लाजिमी है। क्या वरुण गांधी बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी के लिए अब तैयार हो रहे हैं? वरुण गांधी की मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी से आखिर क्यों हुई? क्या वरुण गांधी का सियासी वनवास खत्म होने वाला है? दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही मेल मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है।
