डेस्क:देश की राजधानी का उत्तम नगर इलाका इन दिनों सांप्रदायिक तनाव की आग में झुलस रहा है। होली के दौरान शुरू हुआ दो परिवारों का आपसी झगड़ा अब एक बड़े टकराव का रूप ले चुका है। ईद-उल-फ़ित्र के नज़दीक आते ही इलाके में ‘खून की होली’ खेलने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के बीच गहरे डर का माहौल है। विवाद की जड़: एक गुब्बारा और दो परिवारों की रंजिश
तनाव की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में हुई थी। 4 मार्च: 11 साल की एक बच्ची द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा एक महिला को लगा, जिसके बाद दो परिवारों में हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में घायल 26 वर्षीय तरुण कुमार की चार दिन बाद मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दो परिवारों का पुराना आपसी झगड़ा था, जिसे अब सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।
‘खून की होली’ की धमकी और पलायन का डर
55 वर्षीय स्थानीय निवासी जमील अहमद, जो 50 साल से यहाँ रह रहे हैं, ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि बाहरी तत्वों और कुछ नेताओं के भाषणों ने माहौल बिगाड़ दिया है। मेरे बच्चे और पोते-पोतियां डरे हुए हैं। हमने सुना है कि नेता ‘खून की होली’ खेलने की बात कर रहे हैं। हमारे पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है, लेकिन डर इतना है कि किराएदार पहले ही घर छोड़ चुके हैं। 22 वर्षीय फरजाना ने बताया कि 20 साल से यहाँ रहने के बावजूद अब पड़ोसी ठीक से बात नहीं कर रहे। हिंसा और हमलों की लगातार मिल रही धमकियों के कारण कई परिवार ईद के दौरान कुछ दिनों के लिए इलाका छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “कुछ शोक सभाओं के दौरान आए धार्मिक नेताओं ने हमें धमकियां दीं। यह हत्या कोई सांप्रदायिक मामला नहीं है। वे दोनों परिवार हमेशा से आपस में लड़ते रहे हैं। मुझे डर है कि उनकी [आरोपियों की] गलतियों की कीमत हम सबको चुकानी पड़ेगी। हम शांति से रह रहे हैं, लेकिन बाहर के लोग हमें धमकियां दे रहे हैं। हम वीडियो देखते हैं और वे बहुत डरावने होते हैं। मेरे बच्चे मुझसे बार-बार कह रहे हैं कि ईद के लिए हमें यहां से चले जाना चाहिए। हमारे घर के पास किराए पर रहने वाले दो परिवार तो पहले ही यहां से जा चुके हैं।
