डेस्क: ईरान (Iran) युद्ध का आज 18वां दिन है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को ईरान के नियंत्रण से कैसे मुक्त कराया जाए। ईरान ने यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन विशेष शर्तें लागू की हैं, जिससे इस समुद्री रूट से तेल का परिवहन प्रभावित हो रहा है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 50% कच्चे तेल के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिका ने इस नाकेबंदी को हटाने के लिए नाटो और पश्चिमी देशों से मदद मांगी है, लेकिन ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों ने स्पष्ट समर्थन देने में झिझक दिखाई। कई देश इसे अमेरिका और इज़राइल का युद्ध मानते हुए इसमें खुद को शामिल नहीं करना चाहते।
UAE एयरस्पेस खुला, खतरों से सुरक्षा
संयुक्त अरब अमीरात ने मंगलवार सुबह अपने एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। यह कदम ईरान से आने वाले मिसाइल और ड्रोन खतरों के चलते लिया गया था। हालांकि कुछ ही समय बाद UAE ने अपने एयरस्पेस को फिर से खोल दिया और विमानों को संचालन की अनुमति दे दी, अधिकारियों ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी।
‘नंदा देवी’ एलपीजी टैंकर आज गुजरात पहुंचेगा
भारतीय एलपीजी वाहक ‘शिवालिक’ के भारत पहुंचने के बाद अब लगभग 46,000 मीट्रिक टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस ले जाने वाला दूसरा टैंकर ‘नंदा देवी’ आज गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। नंदा देवी के अधिकारियों के अनुसार यह जहाजरानी भारत सरकार, बंदरगाह और भारतीय नौसैनिक सहायता के सहयोग से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर रहा है।
बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार तड़के बगदाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन और रॉकेट हमलों का सामना करना पड़ा। तीन ड्रोन और चार रॉकेट दूतावास पर गिराए गए, जिनमें से कम से कम एक ड्रोन दूतावास के भीतर ही गिरा।
टैंकरों और ड्रोन हमलों की रिपोर्ट
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार फुजैराह के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल टैंकर से टकराया, जिससे हल्का नुकसान हुआ, लेकिन किसी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ। सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में भी सुरक्षा बलों ने ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक रोका। मंत्रालय ने बताया कि छह अन्य ड्रोन भी नष्ट किए गए। इस स्थिति के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और एलपीजी सप्लाई पर भी नजरें लगी हैं, क्योंकि ‘नंदा देवी’ जैसे टैंकरों की सुरक्षित भारत तक पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
