बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है, जिसके बाद माना जा रहा है कि उनका मुख्यमंत्री के तौर पर लंबा सियासी सफर अब खत्म होने जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार का आखिरी कार्यकाल भी काफी छोटा रहा। उन्होंने नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन महज करीब चार महीने बाद ही राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया।
7 दिन के लिए बने थे पहली बार मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय एनडीए गठबंधन की सरकार बनी थी, लेकिन विधानसभा में बहुमत साबित नहीं हो पाया। इसके चलते नीतीश कुमार को सिर्फ 7 दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव ने राबड़ी देवी को फिर से मुख्यमंत्री बनवा दिया
2005 में वापसी और लंबा शासन
इसके बाद 2005 में नीतीश कुमार ने दमदार वापसी की और बिहार की सत्ता संभाली। अगले कई सालों तक वे राज्य की राजनीति का केंद्र बने रहे। विकास और सुशासन के एजेंडे के साथ उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे।
राज्यसभा जाने के ऐलान से नई चर्चा
अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला आने वाले दिनों में ही साफ होगा।
कुल मिलाकर, जेपी आंदोलन से निकले नीतीश कुमार का लगभग तीन दशक का सियासी सफर अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। उनके इस फैसले के साथ बिहार की राजनीति में एक युग के अंत की चर्चा भी शुरू हो गई है।
आशुतोष झा
