अंतरराष्ट्रीय

“मेरा जन्म उसी दिन हुआ, जब भारत ने इज़रायल को मान्यता दी” -पीएम मोदी ने जोड़ा भावनात्मक रिश्ता

डेस्क: नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने अपने दो दिवसीय इज़रायल (Israel) दौरे के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव से भी खास बताया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ—ठीक उसी दिन, जब भारत ने औपचारिक रूप से इज़रायल को मान्यता (Recognition of Israel) दी थी। इस “रोचक संयोग” का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस देश से हमेशा एक विशेष आत्मीयता महसूस करते रहे हैं।

नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री

यरुशलम में प्रधानमंत्री मोदी ने इज़रायल की संसद नेसेट को संबोधित किया और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक सदन के सामने खड़ा होना उनके लिए सम्मान की बात है, क्योंकि यह दो प्राचीन सभ्यताओं के संवाद का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “मैं 1.4 अरब भारतीयों की शुभकामनाएँ, मित्रता और साझेदारी का संदेश लेकर आया हूँ।”

भारत–इज़रायल संबंध भरोसे और साझा मूल्यों पर आधारित
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध गहरे विश्वास, नवाचार और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके हैं। उन्होंने विज्ञान, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

आतंकवाद पर कड़ा संदेश

अपने संबोधन में मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि
“कोई भी कारण निर्दोष नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकता।”

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई की जरूरत बताते हुए “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति पर जोर दिया और कहा कि आतंक कहीं भी हो, वह पूरी मानवता के लिए खतरा है।

नेतन्याहू ने बताया ‘इज़रायल का सच्चा मित्र’

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी को “इज़रायल का सच्चा मित्र” बताते हुए कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के संबंध अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए हैं।
वहीं, संसद के स्पीकर अमीर ओहाना ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया। सदन में उनके पहुंचने पर गर्मजोशी भरा माहौल देखने को मिला।

रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा

प्रधानमंत्री के इस दौरे में द्विपक्षीय वार्ता, तकनीकी सहयोग, व्यापार विस्तार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा केंद्र में है। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत–इज़रायल रणनीतिक साझेदारी को नई गति देगी और दोनों देशों के बीच नवाचार आधारित सहयोग को और गहरा करेगी।

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