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दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी युद्धपोत USS पर ‘टॉयलेट संकट’, 4500 सैनिकों की बढ़ी मुश्किलें

डेस्क: दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत ‘USS जेराल्ड आर फोर्ड’ (USS Gerald R. Ford) पर इन दिनों तकनीकी खराबी (Technical fault) ने बड़ा संचालन संकट खड़ा कर दिया है। जहाज का सीवेज सिस्टम फेल होने से हजारों सैनिकों को रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

650 में से अधिकांश टॉयलेट बंद, लंबी कतारें
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर मौजूद 650 टॉयलेट्स में से ज्यादातर काम नहीं कर रहे हैं। करीब 4,500 सैनिकों को इस्तेमाल के लिए 40–45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है, जिससे जहाज पर तनाव और असंतोष का माहौल बन गया है।

इस समस्या का खुलासा सबसे पहले The Wall Street Journal की रिपोर्ट में हुआ।

हाई-टेक सिस्टम ही बना परेशानी की जड़

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज में लगा वैक्यूम-आधारित अत्याधुनिक सीवेज सिस्टम बेहद संवेदनशील है। एक वाल्व खराब होने पर पूरा सेक्शन बंद हो जाता है।
NPR के अनुसार, मरम्मत दल को पाइपों में कपड़े, रस्सियां और ठोस जमाव जैसी चीजें मिल रही हैं, जिन्हें हटाने में घंटों लग जाते हैं। कैल्शियम जमा होने की सफाई पर हर बार लाखों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।

8 महीने से समुद्र में तैनाती, थकान बढ़ी

यह युद्धपोत जून 2025 से लगातार समुद्र में तैनात है। सामान्य तौर पर ऐसी तैनाती छह महीने की होती है, लेकिन मौजूदा मिशन लंबा खिंच गया है। रिटायर्ड रियर एडमिरल Mark Montgomery ने कहा कि इतनी लंबी तैनाती क्रू पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ा सकती है।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़ी तैनाती

क्षेत्रीय हालात, खासकर ईरान से जुड़े तनाव के चलते अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई गई है। इस अभियान का नेतृत्व United States Navy कर रही है, जिसने क्षेत्र में कई युद्धपोत तैनात कर रखे हैं।

युवा सैनिकों पर मानसिक दबाव

जहाज पर तैनात बड़ी संख्या में 20–22 वर्ष के युवा सैनिक हैं, जो लंबे समय से परिवार से दूर हैं। ‘घोस्ट मोड’ यानी सीमित संचार वाले मिशन के कारण वे घर से संपर्क भी नहीं कर पा रहे।

Daily Mail को मिले एक पत्र में कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन डेविड स्कारोसी ने भी क्रू की नाराजगी और थकान को स्वीकार किया है।

पिछली घटनाओं से भी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक थकान और ऑपरेशनल दबाव सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकता है। इससे पहले भी क्षेत्र में तैनात USS Harry S. Truman से जुड़े अभियानों में क्रू पर काम के बोझ को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

फिलहाल अमेरिकी बेड़े में USS Abraham Lincoln सहित कई बड़े कैरियर मिडिल ईस्ट में सक्रिय हैं।

13 अरब डॉलर से अधिक लागत वाले इस सुपरकैरियर को अमेरिकी नौसेना की तकनीकी ताकत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मौजूदा तकनीकी गड़बड़ी ने दिखाया है कि अत्याधुनिक सिस्टम भी संचालन के स्तर पर बड़ी चुनौती बन सकते हैं—खासकर तब, जब जहाज लंबे समय तक लगातार मिशन पर हो।

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