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मैथिली के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रामदेव झा की उनके पैतृक गांव कबिलपुर में रविवार की रात पर लिखी पुस्तक का हुआ लोकार्पण 

दरभंगा। मैथिली के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रामदेव झा की वर्षी पर उनके पैतृक गांव कबिलपुर में रविवार की रात उन पर लिखी गई पुस्तक का लोकार्पण लना मिथिला विवि के मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा ने किया। इस अवसर पर उपस्थित जनों ने अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित किया। अपने विचार रखते हुए लोकार्पणकर्त्ता प्रो. झा ने कहा डॉ. रामदेव झा का लेखन क्षेत्र काफी व्यापक था। उन्होंने कथा, निबंध,आलोचना,अनुसंधान,कविता आदि विभिन्न विधाओं में रचना की और हर क्षेत्र में सफल रहे। नाटक की पुस्तक पर तो साहित्य अकादमी का मूल पुरस्कार ही मिल चुका है। आत्मीयता का गुण उनके व्यक्तित्व का अतुलनीय पक्ष था। हर किसी को ऐसा लगता था वे उन्हें दिल से चाहते थे। उनका शिष्य होने का गौरव हर छात्र को आज भी होता है। मौके पर साहित्य अकादमी के अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित एवं लोकार्पित विनिबंध पुस्तक के लेखक डॉ. योगानंद झा ने इस पुस्तक की लेखन यात्रा से सभी को परिचित कराया। डॉ. अमलेन्दु शेखर पाठक ने संस्मरणों को साझा करते हुए कहा डॉ. रामदेव झा का लेखन बेजोड़ है। बहुतेरे लेखक विभिन्न विधाओं में लिखते रहे हैं किंतु सफल किसी खास विधा में रहे। डॉ. रामदेव झा शायद ऐसे अकेले साहित्यकार हैं जिन्होंने जिस किसी विधा में लेखन किया उसमें सफलता के झंडे गाड़े। यही कारण है वे मैथिली के अकेले ऐसे साहित्यकार हैं जिन्हें साहित्य अकादमी का तीन पुरस्कार मौलिक, अनुवाद और बाल साहित्य पुरस्कार मिला।उन्होंने कुशल शिक्षक के रूप में छात्रों-शिक्षकों की विशाल सेना भी खड़ी की। इस अवसर पर उनके पुत्र द्वय कृष्णदेव झा व विजयदेव झा के साथ डॉ. भाग्य नारायण झा, डॉ. सत्येंद्र कुमार झा,रीमा मिश्र, मदन कुमार झा मधुप आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने विचार रखे।

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