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बच्चों को कार नहीं, संस्कार दो : कौशिक चैतन्य, इक्यावन शक्ति पीठ मंदिर में दिव्य ‘कलश यात्रा’ के साथ ‘श्रीमद भागवत कथा’ प्रारंभ

बीकेटी/लखनऊ। व्यास पीठ से कौशिक चैतन्य जी ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम सोपान में गोकर्ण और धुंधकारी के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कलयुग में बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना बेहद आवश्यक है। आप लोग बच्चों को कार नहीं, संस्कार दीजिए। बच्चे खुद महंगी से महंगी कार ले लेंगे।

बीकेटी क्षेत्र के इक्यावन शक्ति पीठ मंदिर प्रांगण में रविवार दोपहर से श्रीमद भागवत कथा प्रारम्भ हुई। इस सात दिवसीय कथा के पूर्व सीतापुर रोड पर दिव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में आसपास के गांवों की सैकड़ों महिलाओं, बच्चों एवं पुरुषों ने हिस्सा लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा यजमान पुष्पा दीक्षित, कथा संयोजक तृप्ति तिवारी एवं वरद तिवारी, कथा व्यवस्थापक स्तुति तिवारी, आचार्य धनंजय पाण्डेय, गीता पाण्डेय, महेश गिरी, समाजसेवी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान व नमन तिवारी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

कौशिक महराज ने कहा कि मेरे भुवनमोहन कन्हैया का मन तो वैसे भी भावनाओं का असीमित आकाश है। परिस्थितियों की मॉंग पर प्रभुता की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए भुवन-मोहिनी बाँसुरी को एक तरफ़ रखकर चक्र भी उठा लेते हैं। इसके लिए अभिशापित मेरे कन्हैया का दुःख केवल उनकी निजी पीड़ा भर नहीं है, बल्कि यह भाव प्रभुता के, शक्ति के, सामर्थ्य के, लोकप्रियता के शीर्ष पर बैठे हर सामर्थ्य-संपन्न व्यक्ति की नियति है।

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