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2027 तक सोना ₹1 लाख के नीचे आने का अनुमान? रूस के कदम के बाद गोल्ड मार्केट में उथल-पुथल, एक्सपर्ट्स का बड़ा आकलन

डेस्क: सोने की कीमतों में चल रही रिकॉर्ड तेजी पर अब ब्रेक लगता नजर आ रहा है। साल 2025 में निवेशकों को मालामाल करने के बाद, 2026 की शुरुआत के साथ ही गोल्ड मार्केट में एक बड़ा ‘करेक्शन’ (गिरावट) शुरू हो गया है। रूस के एक संभावित कदम और वैश्विक समीकरणों के बदलने से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या आने वाले समय में सोना ₹1 लाख के नीचे आ सकता है।

शिखर से 13.5% टूटा सोना: क्या है मौजूदा स्थिति?

जनवरी 2026 में भारतीय बाजार (MCX) पर सोने ने ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर छुआ था। हालांकि, बीते सप्ताह की क्लोजिंग तक कीमतें गिरकर ₹1,56,200 पर आ गईं।

घरेलू गिरावट: अपने उच्चतम स्तर से सोना करीब 13.5% नीचे फिसल चुका है।
ग्लोबल मार्केट: अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) पर भी सोना $5,626.80 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर $5,046.30 पर आ गया है, जो लगभग 10.5% की गिरावट दर्शाता है।
रूस का ‘डॉलर प्रेम’ डाल सकता है सोने पर दबाव
ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट ने सर्राफा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अब दोबारा अमेरिकी डॉलर में ट्रेड सेटलमेंट (व्यापारिक भुगतान) शुरू करने पर विचार कर रहा है।
BRICS को झटका: रूस का यह कदम BRICS देशों की ‘डी-डॉलराइजेशन’ (डॉलर पर निर्भरता कम करने) की मुहिम के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
सेंट्रल बैंकों की रणनीति: पिछले कुछ वर्षों में भारत, चीन और रूस जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदा था, जिससे कीमतें आसमान पर पहुंची थीं। अगर रूस डॉलर की ओर लौटता है, तो अन्य बैंक भी सोने की आक्रामक खरीद रोक सकते हैं या मुनाफावसूली (Profit Booking) कर सकते हैं।
2027 तक ₹1 लाख के नीचे आने का अनुमान?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉलर की मजबूती बरकरार रही और अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती टाल दी, तो सोने पर दबाव और गहराएगा।
$3000 का लक्ष्य: विश्लेषकों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर $3000 प्रति औंस तक आ सकता है।
भारतीय बाजार: यदि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट आती है, तो भारत में सोने की कीमत ₹90,000 से ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में स्थिर हो सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

आमतौर पर अनिश्चितता के दौर में सोना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि 2008 के अनुभवों को देखते हुए, लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड भी अब एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प के रूप में उभर सकते हैं। निवेशकों को फिलहाल बाजार की अस्थिरता को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: सोने की मौजूदा गिरावट को केवल एक अस्थाई ‘करेक्शन’ न मानकर, इसे एक लंबी अवधि के ट्रेंड बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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